मुख्य पृष्ठ

आवश्यक फोन नंबर

चिकित्सा सुविधायें

सहारनपुर क्लासिफाइड

 

सहारनपुर - एक परिचय

हस्तकला उद्योग

अन्य उद्योग

बैंकिंग सुविधायें

व्यापार

सड़क एवं रेल यातायात

जिला प्रशासन

विधि एवं न्याय

पत्रकारिता

शिक्षण संस्थान

वोकेशनल प्रशिक्षण

न्य महत्वपूर्ण संस्थान

स्वर्णिम इतिहास

हमें नाज़ है तुम पर

साहित्य एवं संस्कृति

धर्म एवं आध्यात्म

राजनीतिक मंच

समस्यायें और सुझाव

आपके पत्र

संपर्क सूत्र

 

 

 

सहारनपुर में साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थायें
Saharanpur : Literary, Cultural & Social Service Organisations

 

विभावरी : (स्थापना वर्ष 1983)

साहित्य, समाज एवं संस्कृति  के प्रति मानवीय दायित्वों के निर्वहन की सद्प्रेरणा से पच्चीस वर्ष पूर्व महाराज सिंह कॉलिज के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं हिन्दी भाषा के श्रेष्ठ रचनाकार डा. सीताराम त्यागी के मन में एक ऐसी संस्था के गठन का विचार आया जो साहित्यिक ही नहीं, अन्य क्षेत्रों में भी सेवा कार्य कर सके।  डा. त्यागी ने अपना मन्तव्य ब्रजभाषा और खड़ी बोली की विभिन्न विधाओं के विशिष्ट रचनाकार श्री रघुवीर सिंह ’अरविन्द’ के सम्मुख रखा।  श्री ’अरविन्द’ ने इस मन्तव्य को गति एवं समर्थन प्रदान करते हुए संस्था की स्थापना को मूर्तरूप देने की दिशा में समान विचारधारा वाले साहित्य मनीषियों को एक छत्र के नीचे लाने का सुझाव रखा। 

काव्य-मर्मज्ञ डा. ओमप्रकाश वर्मा, सरस गीतकार श्री धर्मपाल दत्त, अद्भुत गीतों के रचयिता डा. विजेन्द्रपाल शर्मा,  साहित्यानुरागी श्री राजेन्द्र कर्णवाल, राष्ट्रीय विचारधारा के पोषक डा. सुखबीर सिंह सैनी, उर्दू के वरिष्ठ शायर श्री अनवर ताबां तथा गीत एवं ग़ज़ल पर समान अधिकार रखने वाले श्री प्रह्लाद ’आतिश’ की उपस्थिति में २५ अगस्त १९८३ को विभावरी के गठन की विधिवत्‌ घोषणा की गई।   उसी विभावरी में आज समाज के विभिन्न वर्गों से ७३ गणमान्य सक्रिय सदस्य हैं।  विभावरी को और अधिक प्रामाणिक बनाने के लिये १६ सितं. १९८९ को इसका विधिवत्‌ पंजीयन कराया गया।  

विभावरी एक गैर राजनैतिक संस्था है जो निम्न गतिविधियों का संचालन कर रही है --

१ -      साहित्यिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन ।

२-        हिन्दी साहित्य के सृजन में योगदान देना तथा समय-समय पर सुरुचिपूर्ण सद्साहित्य का प्रकाशन करना।

३-        साहित्यिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्र की विशिष्ट प्रतिभाओं को समय-समय पर सम्मानित करना तथा राष्ट्रीय भावना को पुष्ट करना

पिछले पच्चीस वर्षों में आयोजित प्रमुख कार्यक्रम

१-         १३ अप्रैल १९८६ को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन  (साथ ही,  ५१ निर्धन व्यक्तियों को वस्त्र वितरण) ।

२-        कई वर्षों तक सुभाष जयंती के सुअवसर पर निस्सहाय लोगों को रजाई वितरण किया गया।

३-        प्रति वर्ष हिन्दी दिवस पर इंटरमीडिएट स्तर तक के छात्र-छात्राओं के लिये भाषण / वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन ।

४-        देशभक्ति गीतों का गायन, ज्वलंत समस्याओं पर भाषण/वाद-विवाद प्रतियोगितायें, लोकगीत गायन, भक्तिगीत गायन, दोहा पाठ, प्रेरक प्रसंग प्रतियोगिताओं का आयोजन।  इन सभी प्रतियोगिताओं में विभावरी परिवार के सदस्यों का भाग लेना वर्जित है ताकि आयोजन की विश्वसनीयता पर आंच न आये।

५-        छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण व शीत काल से पूर्व स्वेटर वितरण।

६-         वर्ष १९९२ में ग्राम सरखड़ी शेख में हिन्दू - मुस्लिम दंगा रोकने में प्रभावी एवं अविस्मरणीय भूमिका रही।

७-        मां शाकम्भरी देवी के दर्शन हेतु पैदल जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए कलसिया में तीन वर्षों तक दस-दिवसीय निःशुल्क भोजन एवं जलपान शिविर।

८-         १९९३ में आटा चक्कियों को विद्युत विभाग से प्रतिबंध - मुक्त कराना।

९-         निराश्रित विधवा महिलाओं को निःशुल्क सिलाई सिखाने वाली संस्था ’सेवा भारती मंडल’  को सिलाई मशीनें वितरित कराई गईं।

१०-        इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सहारनपुर शाखा के सक्रिय सहयोग से २ अक्तूबर २००६ को नगर में तुलसी के १०००० पौधे वितरित किये तथा "तुलसी - एक संपूर्ण औषधीय पौधा"  विषय पर पत्रिका की ३००० प्रतियां वितरित कीं व इस प्रकार नगर में तुलसी वितरण की शुभ परंपरा का सूत्रपात किया।

११-         प्रतिभाशाली छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।

१२-        शहीदे आज़म स. भगत सिंह की जयंती पर जिले के समस्त स्वतंत्रता सेनानियों का अभिनन्दन  व इसी प्रकार समाज व साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट सेवा प्रदान करने पर अनेकानेक विभूतियों का सार्वजनिक अभिनन्दन ।

१३-         अंबेदकर जयन्ती,  गांधी जयन्ती, नेहरू जयन्ती, शास्त्री जयन्ती, महावीर जयन्ती, रविदास जयन्ती, महामना मालवीय जयन्ती,  क्रिसमस, दुष्यंत कुमार पुण्यतिथि, वीर हकीकत राय बलिदान दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, बसन्तोत्सव, जन्माष्टमी, होली,  दीपावली,   ईद  आदि आदि पर्वों पर विशेष काव्य-गोष्ठियों का निरंतर आयोजन किया जाता है।  इन गोष्ठियों को -- भारत माता तुझे प्रणाम,  राष्ट्रवन्दना,  नूतन वर्षाभिनन्दन,  ओ मां, तुझे नमन्‌ ! , उन्हें प्रणाम,  उजाले की ओर,  वासन्ती काव्य संध्या आदि शीर्षकों से अभिव्यक्त किया जाता रहा है।

१४-         संस्था के मंच से विभिन्न गीतकारों के गीत-संग्रह / काव्य संकलन आदि का भव्य लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित करना विभावरी की परंपरा है।

१५-         संस्था के रजत-जयंती वर्ष में काव्य-कलश का प्रकाशन । 

 

सामाजिक संस्थायें

संकल्प

मानव मंदिर

मदर टेरेसा होम

भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम

भारतीय नेत्रहीन विद्यालय

संस्कार निधि

रंगकर्म

अदाकार ग्रुप

इप्टा (IPPTA)

मानसी सांस्कृतिक चेतना मंच

साहित्यिक / सांस्कृतिक संस्थायें

विभावरी

समन्वय

हाजी मकबूल मैमो. सोसायटी

राष्ट्रीय / अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की प्रतिनिधि संस्थायें

संस्कार भारती

भारत विकास परिषद‌

लॉयन्स क्लब

रोटरी क्लब

Your Voice

Visit the Guest Book

Contact Us

Useful Web Links