|
उत्तरी रेलवे ने (जिसके अन्तर्गत सहारनपुर आता है) सहारनपुर को सहारनपुर जंक्शन नाम दिया है। सच, सहारनपुर एक जंक्शन ही तो है! जंक्शन भिन्न - भिन्न रेल व सड़क मार्गों का; जंक्शन गंगा - यमुनी तहज़ीब का; जंक्शन भिन्न-भिन्न धर्मावलंबियों का; जंक्शन प्राचीनतम और अत्याधुनिक का; जंक्शन उ.प्र., उत्तराखण्ड, हरियाणा, पंजाब और हि.प्र. का। मुम्बई - हावड़ा तथा मुम्बई- अमृतसर भारत के विभिन्न छोरों को जोड़ने वाले प्रमुख रेलमार्ग हैं जो सहारनपुर से होकर निकलते हैं। सहारनपुर से न केवल मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, अमृतसर, लखनऊ, अहमदाबाद, ओखा, जम्मू तावी, देहरादून और चण्डीगढ़ आदि के लिये रेलगाड़ियां सुलभ हैं अपितु एक ब्रांच लाइन शामली, बड़ौत, बागपत होते हुए शाहदरा - दिल्ली से भी मिलाती है। सहारनपुर में एक और रेलवे स्टेशन भी है - टपरी ! दोनों स्टेशनों के बीच का अंतर लगभग 5 किमी है। देहरादून और दिल्ली को जोड़ने वाली कुछ महत्वपूर्ण ट्रेन टपरी में रुकती हैं और सहारनपुर वासियों को मुंह चिढ़ाते हुए लूप लाइन के सहारे सीधे देहरादून की ओर मुड़ जाती हैं। ऐसी ही एक लूप लाइन लक्सर से पहले भी बना दी गई है ताकि देहरादून जाने-आने वाली महत्वपूर्ण रेलगाड़ियां लक्सर स्टेशन का प्रयोग करने के लिये विवश न हों। (जब तक यह लूप लाइन नहीं थीं, रेलगाड़ियों को लक्सर व सहारनपुर स्टेशनों पर दिशा बदलने हेतु इंजन को हटा कर दूसरे सिरे पर लगाना पड़ता था जिसमें आधा घंटा अतिरिक्त लग जाता था।) टपरी स्टेशन पर उतरना - चढ़ना स्वयं में कोई समस्या नहीं है। समस्या है तो सिर्फ ये कि यदि आपका कोई संबंधी या मित्र टपरी स्टेशन से उतर कर आने वाला हो तो आपको अपने वाहन से उसे लेने जाना पड़ेगा। इस मार्ग पर केवल तीन पहिया वाले टेंपो चलते हैं, (एक दो मास पहले तक सड़क के नाम पर भी सिर्फ गढ्ढे ही गढ्ढे थे) । तीन-चार टैंपो में जब पूरी ट्रेन की सवारियां एडजस्ट होना चाहेंगी तो आप सहज ही कल्पना कर सकते हैं कि क्या दशा होगी! सहारनपुर के लोग टपरी-सहारनपुर मार्ग को सुविधा-सम्पन्न बनाने के स्थान पर रेलवे विभाग से लड़ते-भिड़ते रहते हैं कि इन ट्रेनों को टपरी में न रोक कर सहारनपुर स्टेशन तक लाया जाये! शेखचिल्लीपना इसी को कहते हैं शायद ! सड़क यातायात का जहां तक संबंध है, सहारनपुर नगर में ही तीन बस अड्डे हैं। कहते हैं कि पुरानी आदतें आसानी से नहीं जातीं! मेरी बाल्यावस्था में ही यू. पी. रोडवेज़ का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम कर दिया गया था पर उत्तर प्रदेश के अन्य सभी शहरों की तरह सहारनपुर में आज भी मुख्य बस अड्डा रोडवेज़ बस स्टैंड ही कहलाता है जो रेलवे स्टेशन के एकदम बाहर है। यहां से आप दिल्ली, आगरा, लखनऊ, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी, यमुनानगर, अंबाला, चण्डीगढ़ आदि आदि शहरों के लिये बसें पकड़ते हैं। ये बसें या तो उ. प्र. रा. सड़क परिवहन निगम की सेवा में हैं या पड़ोसी राज्यों की परिवहन निगमों द्वारा संचालित हो सकती हैं। यहीं पर टैक्सी स्टैंड भी है जहां पर देहरादून के लिये टैक्सी यूनियन द्वारा निर्धारित दरों पर सफेद एम्बेसेडर टैक्सी प्रति सवारी या पूरी टैक्सी के रूप में उपलब्ध हैं। यह टैक्सी स्टैंड से स्टैंड तक ही चलती हैं। आप यदि पूरी टैक्सी करना चाहें तो भी घर तक आने जाने के लिए आपको अलग से रेट तय करने होंगे। प्रति सवारी सिस्टम में ये टैक्सी वाले छः सवारियां लेते हैं अतः आराम की अवधारणा तो समाप्त ही हो जाती है। शायद यह भी एक कारण है कि ये टैक्सियां अपना महत्व और लोकप्रियता खोती चली जा रही हैं। हां, इसी टैक्सी स्टैंड से सट कर मेरठ - अंबाला रूट पर चलने वाली प्राइवेट बसें भी हुआ करती थीं किन्तु न्यायपालिका के आदेश के चलते उनका संचालन अवैध हो गया है और इस प्रकार एक बहुत जनोपयोगी सेवा अब उपलब्ध नहीं है। दूसरा बस स्टैंड जगाधरी - नकुड़ - गंगोह बस स्टैंड कहलाता है और यह रोडवेज़ बस स्टैंड के ही निकट किन्तु अंबाला रोड पर स्थित है। यहां से बसें सरसावा, नकुड़, गंगोह आदि ग्रामीण क्षेत्रों के लिये चलती हैं। आज सरसावा, नकुड़, गंगोह ग्रामीण क्षेत्र नहीं लगते पर इन प्राइवेट बसों का रंग-ढंग आज भी ग्रामीण ही है। कुछ वर्ष पहले तक यहां दिल्ली अड्डा भी हुआ करता था जहां से काश्मीरी गेट दिल्ली अड्डे के लिये प्राइवेट बसें चलती थीं। ये बसें न तो एक मिनट भी देरी से चलती थीं और न ही एक मिनट भी देरी से पहुंचती थीं। न जाने किस प्रतिगामी तर्क के चलते न्यायपालिका ने इस बेहतरीन सेवा को प्रतिबंधित कर दिया और निगम की ढीली-ढाली बस सेवा को सहारनपुर - दिल्ली रूट पर चलने का एकाधिकार दे दिया। अब न तो बस के चलने का कोई समय निश्चित है और न ही पहुंचने का। कभी - कभी चार-पांच बसें एक साथ जाने को तैयार दिखती हैं तो कभी एक बस के दर्शन को भी तरस जाते हैं। तीसरा बस स्टैंड विकासनगर - चकरौता की ओर जाने वाली बसों के लिये है जो रेलवे स्टेशन से ढाई-तीन किलोमीटर दूर बैठता है। यहीं से आप मां शाकुम्भरी देवी शक्तिपीठ के लिये भी बस पकड़ सकते हैं। यद्यपि यह सड़क कलसिया, बेहट, विकासनगर होते हुए चकरौता तक जाती है पर इस सड़क का लोकप्रिय नाम बेहट रोड है और इस बस अड्डे का नाम भी बेहट अड्डा ही है। |
|
