सहारनपुर  जनपद का गौरव : पूरनमल रामलाल डिग्री कॉलेज, गंगोह

Pride of District Saharanpur : Pooranmal Ramlal Degree College Gangoh

महाविद्यालय के बहुमुखी विकास के आधार स्तंभ

तीन सदी के युग प्रवर्तक ब्रह्मलीन संत शिरोमणि बाबा कल्याण देव जी महाराज का पावन सान्निध्य पूरनमल रामलाल गंगोह डिग्री कॉलेज को निरंतर मिलता रहा, यह वास्तव में इस महाविद्यालय के लिये अत्यन्त गौरव व सौभाग्य का ही विषय है। 

पूरनमल रामलाल डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री पवन कुमार का विद्यालय की प्रगति में अप्रतिम योगदान है। पेशे से कृषक,  स्वभाव से समाज सेवी व दानवीर श्री पवन कुमार का पूरा परिवार इस संस्थान से आत्मिक रूप से जुड़ा हुआ है और अमेरिका में रहते हुए भी आपके दोनों पुत्र - डा. अनुराग कुमार मित्तल व इंजी अनुपम मित्तल विद्यालय की प्रगति में निरंतर रुचि रखते हैं व इसको अधुनातन स्वरूप देने की निरंतर चेष्टा करते रहते हैं।  डा. अनुराग मित्तल आई.आई.टी. रुड़की से डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त करने के पश्चात्‌ Intel company में महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रहे हैं और आपकी धर्मपत्नी - इंजी. मालिनी मित्तल, भी आई.आई.टी. रुड़की से इंजीनियरिंग की स्नातक उपाधि पाने के बाद अमेरिका में ही कार्यरत हैं।  इंजी. अनुपम मित्तल बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.टेक. उपाधि प्राप्त इंजीनियर हैं व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रीना मित्तल भी कंप्यूटर में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के पश्चात्‌ अमेरिका में बसे हुए हैं। 

महाविद्यालय के कर्मठ सचिव श्री सुरेश चन्द्र गुप्ता एच.आर. इंटर कॉलेज से अवकाश प्राप्त प्राध्यापक हैं और शिक्षा के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखते हुए, अपने विशाल अनुभव को लाभ इस महाविद्यालय को निरंतर देते चले आ रहे हैं।      

उच्च शिक्षा को समर्पित प्रबन्ध समिति के द्वारा संचालित इस महाविद्यालय की बागडोर आई.आई.टी. रुड़की के स्नातक डा. पवन कुमार बंसल के कुशल हाथों में है जिनके शब्दों में - "हमारे सामाजिक ताने-बाने के विभिन्न घटकों की दृष्टि में शिक्षा के उद्देश्य भी भिन्न - भिन्न हो सकते हैं। जहां सरकारी दृष्टिकोण से देखें तो शिक्षा का उद्देश्य न्याय व कानून व्यवस्था का महत्व समझ वाली ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना है जो समाज के लिये उपयोगी हो और अपने समाज के विभिन्न वर्गों के विकास हेतु कार्य करने में संतोष का अनुभव करे। वहीं, अभिभावकों की दृष्टि से देखें तो शिक्षा उनके बच्चों को एक कुशल व्यवसायी के रूप में पुष्पित - पल्लवित करती है। अध्यापकों की दृष्टि में शिक्षा का उद्देश्य वह जानकारी व योग्यता बच्चों को प्रदान करना है जो जीवन भर उनके लिये उपयोगी हो और वह आजीवन ज्ञान प्राप्त करने को तत्पर जिज्ञासु प्रवृत्ति के बने रहें। छात्रों के दृष्टिकोण से सोचें तो उनका उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना है जो जीवन में उनको सफलता की ओर लेकर जाये और उनको सम्मानजनक कैरियर प्रदान करे। वास्तव में इन चिंतन शैलियों में परस्पर विरोधाभास कहीं नहीं है बल्कि ये सभी एक दूसरे के पूरक ही हैं। उदाहरणार्थ, एक लग्नशील छात्र उसे कहेंगे जो शिक्षा प्राप्त करने में अपनी ऊर्जा का निर्बाध उपयोग करता है, विद्यालय परिसर में पर्याप्त समय देता है, शिक्षणेतर गतिविधियों में भी पर्याप्त रुचि लेता है, और अपने अध्यापकों व सहपाठियों के साथ निरंतर संवाद बनाये रखता है। यही वह कारक हैं जो एक छात्र को महज एक कर्मचारी नहीं बल्कि अपने कार्य के प्रति पूर्णतः समर्पित व्यवसायी के रूप में ढालते हैं।"

    

 

 

 

 

 

सहारनपुर जनपद अपने जिन शिक्षण संस्थानों पर वास्तव में गर्व कर सकता है उनमें पूरनमल रामलाल डिग्री कॉलेज, गंगोह का नाम निस्संदेह पहले नंबर पर लिया जा सकता है। अभी हाल ही में एक सर्वेक्षण के अन्तर्गत, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अन्तर्गत चल रहे सभी महाविद्यालयों को शैक्षणिक, प्रशासनिक आदि मापदण्डों पर जांचा गया था। इस सर्वेक्षण के अनुसार सहारनपुर जनपद के गंगोह कस्बे में वर्ष १९९४ में स्थापित किये गये इस महाविद्यालय को विभिन्न मापदण्डों के आधार पर सर्वोत्कृष्ट आंका गया है।

गंगोह के विद्यार्थियों को विज्ञान, कला एवं वाणिज्य विषयों में उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान कर रहे इस महाविद्यालय की स्थापना का श्रेय दो महानात्माओं को जाता है जिनके नाम पर यह महाविद्यालय चल रहा है। श्री रामलाल जी व श्री पूरनमल जी द्वारा क्रमशः १९१६ व १९६४ में दो अलग-अलग ट्रस्ट स्थापित किये गये जिनका उद्देश्य एक ही था - गंगोह के विद्यार्थियों, विशेषकर बालिकाओं को उच्च शिक्षा, तकनीकी व दैनंदिन जीवन में उपयोगी शिक्षा की श्रेष्ठ सुविधायें उपलब्ध कराना। पहले १९२४ में रामलाल ट्रस्ट के द्वारा एक हाई स्कूल की स्थापना हुई और फिर दोनों ट्रस्ट द्वारा वर्ष १९६९ में यह तय किया गया कि दोनों ट्रस्ट के समेकित प्रयासों से एक महाविद्यालय की स्थापना की जाये और इसके लिये पूरनमल रामलाल डिग्री कॉलेज सोसायटी गंगोह का गठन कर दिया गया। इस सोसायटी के संस्थापक सदस्यों में सर्वश्री बानूमल, रामगोपाल अग्रवाल, पवन कुमार, सुमेर चन्द, जीत राम, विजय कुमार व कान्ता प्रसाद आदि सम्मिलित रहे। इसके बाद शुरु हुई एक लंबी साधना जिसका सुपरिणाम जनता के सम्मुख आया वर्ष १९९४ में, जब पूरनमल रामलाल डिग्री कॉलेज का विधिवत्‌ शुभारंभ हुआ और इसे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (पूर्व नाम मेरठ विश्वविद्यालय) के अंतर्गत महाविद्यालय के रूप में मान्यता मिली।
वर्तमान में यह महाविद्यालय विज्ञान, कला व वाणिज्य संवर्गों में स्नातक स्तर की शिक्षा प्रदान कर रहा है। बी.ए. में हिन्दी, अंग्रेज़ी, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र व शिक्षाशास्त्र; बी.कॉम में कॉमर्स ग्रुप, एकाउंट्स ग्रुप व मैनेजमैंट ग्रुप; बी.एससी. में भौतिकी, रसायन, गणित, जन्तु विज्ञान एवं पादप विज्ञान विषयों में शिक्षा कार्य चल रहा है और महाविद्यालय के छात्र-छात्रायें अपने-अपने विषयों में निरंतर श्रेष्ठ परिणाम देते चले आरहे हैं।

श्री पवन कुमार जी की अध्यक्षता में संचालित प्रबंध समिति में नगर के अनेकानेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, दानवीर, शिक्षाशास्त्री व इस महाविद्यालय के प्राचार्य व प्राध्यापक आदि सम्मिलित हैं। सोसायटी के सदस्यों में अनेकानेक विभूतियां ऐसी हैं जो भारतवर्ष में ही नहीं अपितु सुदूर यूरोप व अमेरिका के देशों में भी सहारनपुर व विशेषकर गंगोह की कीर्ति दिग्दिगन्त में विस्तारित कर रहे हैं। जहां एक ओर माननीय न्यायमूर्ति भारत भूषण अग्रवाल (अ.प्रा.) इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल मेरठ के पीठासीन अधिकारी हैं तो श्री धनेन्द्र कुमार, (आई.ए.एस.) वर्ल्ड बैंक, वाशिंगटन में कार्यकारी निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर आसीन रहे हैं। श्री मुकुट बिहारी लाल, लै. कर्नल हरिराज स्वरूप (अ.प्रा.), लै. कर्नल श्रवण कुमार (अ.प्रा.), श्री राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, आई.ए.एस. (अ.प्रा.), श्री शेखर अग्रवाल (आई.ए.एस.), श्री शंकर अग्रवाल (आई.ए.एस.), श्री मुकु गोयल, (आई.पी.एस.), श्री दिनेश कुमार मित्तल (आई.ए.एस.) आदि। स्थान की सीमा को देखते हुए सभी माननीय सदस्यों के नाम यहां दे पाना संभव नहीं है। किन्तु इन सभी उच्च-पदस्थ सदस्य महानुभावों का निरंतर सहयोग, प्रेरणादायक साहचर्य एवं मार्गदर्शन इस महाविद्यालय के प्राध्यापक वर्ग एवं विद्यार्थियों को सदैव उपलब्ध रहता है। वास्तव में ये समस्त सदस्य इस महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिये अनुकरण करने योग्य उदाहरण के रूप में सदैव सम्मुख रहते हैं। 

किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता का वास्तविक श्रेय उसके प्राध्यापक वर्ग को जाता है जिनसे ज्ञानार्जन करते हुए उस संस्थान के शिक्षार्थी अपने जीवन पथ पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ते रहते हैं। भारत के अभूतपूर्व राष्ट्रपति व महान वैज्ञानिक श्री ए.पी. जे. अब्दुल कलाम के शब्दों में, "अध्यापक वह सीढ़ी है जिस पर चढ़ कर विद्यार्थी अपने जीवन में ऊंचाइयां हासिल करते हैं पर वह सीढ़ी अन्य विद्यार्थियों के उपयोग हेतु वहीं खड़ी रहती है।" पूरनमल रामलाल डिग्री कॉलेज में उच्च शिक्षित व अध्यापन को जीवन का एकमात्र ध्येय समझने वाले प्राध्यापकों की कोई कमी नहीं है जो स्वयं तो मशाल की तरह जलते हैं पर पथ पर आ-जा रहे राहगीरों के मार्ग को प्रशस्त करते रहते हैं। विद्यालय में कला संकाय में पांच, वाणिज्य संकाय में दो, विज्ञान संकाय में सात प्राध्यापक हैं व इन सबको मार्गदर्शन दे रहे प्राचार्य डा. पवन कुमार बंसल विश्व के सुप्रसिद्ध इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान आई.आई.टी. रुड़की से Post Graduate हैंM.Sc., M.Phil. एवं Ph.D. हैं।

(प्राचार्य डा. पवन कुमार बंसल मेरठ विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. काक को महाविद्यालय की गृह पत्रिका "प्रगति" की प्रति भेंट करते हुए)

इन सभी प्राध्यापकों से ज्ञान और प्रेरणा पाकर इस महाविद्यालय के छात्र-छात्रायें अपने परिवार, कॉलेज, नगर, जनपद और प्रदेश का भी नाम रौशन करते हुए जीवन में सफलता की नित नई इबारत लिख रहे हैं।

इस महाविद्यालय की प्रगति तो उसी समय सुनिश्चित हो गई थी जब इसे युगान्तरकारी ब्रह्मलीन संत शिरोमणि बाबा कल्याण देव जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हो गया था। बाबा को इस संस्थान से सदैव विशेष लगाव रहा और विभिन्न अवसरों पर उनका सान्निध्य इस महाविद्यालय को प्राप्त होता रहा है। आज भी बाबा के प्रतिनिधि के नाते बाबा ओमानन्द जी इस शिक्षण संस्थान पर अपना आशीष सूचक वरद हस्त बनाये हुए हैं।