| श्री राघव लखनपाल शर्मा - सहारनपुर के युवा विधायक |
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(उत्तर प्रदेश की विधानसभा में सहारनपुर नगर का
प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक श्री राघव लखनपाल एक सुसभ्य, सुसंस्कृत व
सुदर्शन व्यक्तित्व के युवा हैं। व्यवसाय से उद्योगपति राघव दून स्कूल,
देहरादून के छात्र रहे हैं और भाजपा के उज्ज्वल चेहरों में से एक हैं।
चिंतन के पाठकों के लिये चिंतन संपादक श्री सुशान्त सिंहल द्वारा उनसे
की गई बातचीत पर आधारित आलेख प्रस्तुत है।) |
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प्रश्न - क्या आधुनिक भारत आपके सपनों का भारत है ?
यदि नहीं तो आपके सपनों का भारत कैसा होगा ? आधुनिक भारत मेरे सपनों को भारत है या नहीं, यह प्रश्न तो वास्तव में मेरे से पहली पीढ़ी के लोगों से पूछा जाना ज्यादा उचित होगा जिन्होने देश की आजादी के लिये स्वप्न देखे व इसके लिये अपने प्राणों की आहुति दी। हम तो आजादी का स्वाद चखने वाली पीढ़ी हैं जिस पर इस स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने का दायित्व है। तथापि, मैं उन महान स्वतंत्रता सेनानियों की दृष्टि से भी सोच कर देखूं तो कहूंगा कि उनके सब सपने तो साकार नहीं ही हुए होंगे। आजादी पाये हुए हमें इतने वर्ष हो गये हैं और आज भी हमारा देश अनेकानेक समस्याओं से संत्रस्त है। कई बार तो लगता है कि आजादी के बाद हमने अपनी राह चुनने में ही तो कोई गलती नहीं कर दी। मैं तो ऐसे भारत की कल्पना किया करता हूं जहां कोई भी निरक्षर न हो, जहां ज्ञान-विज्ञान का बोलबाला हो। अपराध विहीन भारत मेरे सपनों का भारत है। प्रश्न - आपकी दृष्टि में देश की सर्वप्रमुख समस्यायें क्या हैं? देश को झकझोरने वाली समस्याओं का जिक्र करना हो तो मैं जिन समस्याओं को सबसे गंभीर मानता हूं उनमें जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि, अशिक्षा एवं आतंकवाद सबसे विकराल हैं। हमारे पास देश में जितने भी संसाधन हैं उनका समुचित वितरण समाज के सभी अंगों में न हो पाना भी बहुत गंभीर समस्या है। प्रश्न - पर क्या यह सच नहीं है कि सूचना क्रांति के इस युग में भारत अपनी एक नयी भूमिका लिख रहा है, सुपर पावर बनने की राह पर बढ़ रहा है, हमारे कंप्यूटर प्रोफेशनल आज विदेशों में भारी मांग में हैं ? जो आबादी हमारा दायित्व हुआ करती थी, वह अब संपत्ति बनती नज़र आ रही है? मैं आपकी इस राय से इत्तेफाक नहीं रखता कि आई टी क्षेत्र में दिखाई दे रही क्रांति के चलते हमारी विशाल जनसंख्या अब दायित्व के स्थान पर हमारी सम्पत्ति बन रही है। दस - बीस हज़ार युवाओं को कॉल सैंटर में नौकरी मिल जाने से न तो बेरोज़गारी की समस्या हल होने जा रही है और न ही शेष आबादी के प्रति हमारे दायित्वों में कोई कमी होने जा रही है। आज विदेशी कंपनियों को भारत के युवा वर्ग में अपने लिये पढ़े लिखे सस्ते मज़दूर दिखाई दे रहे हैं। इन नौकरियों के लिये उनके अपने देश के युवा तैयार नहीं हैं । हमारे बेरोजगारी से परेशान युवा अगर इन नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं तो इसमें हमारे लिये इतनी गर्व करने लायक क्या बात है? इन नौकरियों में इन छात्रों का कोई विशेष उज्ज्वल भविष्य भी मैं देख नहीं पा रहा हूं। प्रश्न - यदि कभी आपको इतने अधिकार मिलें कि आप समाज हित में जो चाहे पग उठा सकें, तो आपकी क्या प्राथमिकता होंगी ? यदि आपकी कल्पनानुसार मुझ पर देश की समस्याओं के निराकरण की पूरी जिम्मेदारी होती तो मैं इन समस्याओं के समाधान को ही अपनी प्राथमिकता मान कर चलता। प्रश्न - आप सहारनपुर के जन-प्रतिनिधि हैं । जनता का अपार स्नेह आपको प्राप्त है जो आपसे बहुत आशा लगाये हुए है। अपने क्षेत्र की कौन-कौन सी समस्यायें आपकी प्राथमिकता में हैं ? सहारनपुर की समस्याओं का जिक्र करूं तो मैं बढ़ रही आबादी के अनुपात में नागरिक सुविधाओं की भयंकर कमी, बिजली, पानी, सड़क की दुर्दशा, बढ़ रहा प्रदूषण मेरी चिंता के विषय हैं। प्रश्न - आपने इन समस्याओं के निराकरण के लिये क्या कुछ विशेष प्रयास किये हैं ? मैं इन समस्याओं को लेकर निरंतर सजग रहता हूं और विधानसभा में और विधानसभा के बाहर इन समस्याओं के समाधान के लिये आवाज़ बुलन्द करता रहता हूं। इस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं है अतः विपक्षी सदस्य होने के नाते हम एक सीमा तक ही समस्याओं के निराकरण में सफल हो पाते हैं। प्रश्न - सन् 47 तक इस देश में विदेशी सरकार थी, देश की परतंत्रता सबसे बड़ी समस्या थी पर गांधी जी और अनेकानेक देशभक्तों ने जन शक्ति पर भरोसा किया और ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंका। आप तो जन प्रतिनिधि हैं, जनता आपके साथ है फिर आप सरकार का मुंह क्यों ताक रहे हैं? यदि आप जन नायक के रूप में जन समस्याओं के निदान के लिये कोई जन आंदोलन खड़ा करना चाहें तो क्या आपको जनता का अपार समर्थन व सहयोग नहीं मिलेगा? हमने अपनी पार्टी संगठन का इस संबंध में आह्वान किया है और हमारी पार्टी जन-समस्याओं के लिये आंदोलन की तैयारी में है। प्रश्न - प्रश्न पूरे नगर का है, आप भी पूरे नगर के प्रतिनिधि हैं सिर्फ भाजपा के नहीं। फिर आप स्वयं को भाजपा तक क्यों सीमित रखना चाहते हैं, पूरे नगर को क्यों नहीं अपने साथ जोड़ कर चलते? क्या आप को ऐसा नहीं लगता कि एक भी आंदोलन को आप सफलता पूर्वक सम्पन्न कर लें तो सहारनपुर के इतिहास में आपका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जायेगा ? आपकी इस भावना का मैं कायल हूं और जन - समस्याओं को इस परिप्रेक्ष्य में देखने की आपकी दृष्टि अति उत्तम है। मैं इससे सहमत भी हूं। प्रश्न - मैं आपके सम्मुख एक एजेंडा रख रहा हूं - पावंधोई नदी का जीर्णोद्धार । यह प्राचीन नदी नगर के बीचों बीच से बह रही है और दुरवस्था में है । नदी के मार्ग में आने वाले पुलों के आधार पर इस नदी को छः भागों में विभक्त किया जा सकता है। यदि मैं सभी राजनैतिक दलों का आह्वान करूं कि वे इसका एक - एक हिस्सा गोद ले लें और अपने हिस्से को साफ सुथरा और पवित्र बनाने की गारण्टी लें तो क्या आपकी पार्टी इस स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा में भाग लेने हेतु तत्पर है? क्या आप अपने द्वारा चुने गये क्षेत्र की सफाई और संभाल की जिम्मेदारी लेंगे? क्यों नहीं? यदि ऐसी कोई योजना बनती है तो हमारी पार्टी इसमें पूरे उत्साह से सम्मिलित होगी। |
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