| पं. केदारनाथ प्रभाकर : विशिष्ट में भी अति विशिष्ट Pt. Kedar Nath Prabhakar, D. Lit. : Galaxy amongst Stars | |
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डा. पं. केदारनाथ ’प्रभाकर’ मात्र एक व्यक्ति नहीं, अपितु स्वयं में एक संस्था हैं। उनका पूरा परिचय देने के लिये यह स्थान नितान्त अपर्याप्त है। अनेकानेक नाम जैसे - स्वामी रामतीर्थ केन्द्र, भारतीय ज्योतिर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान, वेदचक्षु पत्रिका, कालविज्ञान, श्री महादेव मंदिर, श्री नवग्रह देवालय, रामतीर्थ विचार गोष्ठी, वराहमिहिर महोत्सव, अल्लामा इकबाल, काका साहेब कालेलकर, योगीराज बाबा लालदास, संत कबीर आदि पं. केदारनाथ प्रभाकर जी से अभिन्न रूप से जुड़े हैं। ज्योतिष आपके रक्त में रचा बसा है और पिछली तेरह पीढ़ियों से आपके परिवार में ज्योतिष की परंपरा चली आ रही है। स्वामी रामतीर्थ और पं. जी के पिता पं. गौरीनाथ राजज्योतिषी समकालीन व मित्र रहे हैं अतः स्वामी रामतीर्थ को आप बाल्यकाल से ही अपनी प्रेरणा मानते चले आ रहे हैं। आचार्य वराहमिहिर द्वारा स्थापित मिहिरावली (वर्तमान महरौली, दिल्ली) में मौजूद प्रकाश स्तंभ, वेधशाला (जिसे कुतुब मीनार कहा जाता है) पर किया गया आपका शोध सर्वकालिक महत्व का है और निर्विवाद रूप से यह सिद्ध करता है कि कुतुब मीनार वास्तव में ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी में विश्वविख्यात महान खगोलवेत्ता भारत विभूति आचार्य वराहमिहिर द्वारा निर्मित विज्ञान मंदिर (वेधशाला) का मध्यवर्ती मेरुस्तम्भ है। वराहमिहिर, कालिदास और सम्राट विक्रमादित्य समकालीन थे। अपने यौवनकाल में पं. केदारनाथ निरंतर दस वर्षों तक फुलवारी आश्रम में स्थित अखाड़े में जाकर दंड लगाते रहे हैं। 1000 दंड बैठक लगाना आपके लिये अत्यन्त सहज रहा है। यह शारीरिक साधना आपके शोधकार्यों के निमित्त दुर्गम, पहाड़ी स्थलों पर की गई अनेकानेक पैदल यात्राओं के समय बहुत काम आती रही है। पतित पावनी गंगा, मां वैष्णों देवी, आचार्य वराहमिहिर एवं स्वामी रामतीर्थ - ये चारों पंडित जी के लिये आकर्षण के सर्वप्रमुख केन्द्र रहे हैं।
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डा. पं. केदारनाथ प्रभाकर, डी. लिट् का संक्षिप्त परिचय |
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जन्म |
10 मई 1937 गुजरांवाला (वर्तमान में - पाकिस्तान में) |
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माता-पिता |
पं. गौरीनाथ राजज्योतिषी |
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कर्मस्थली एवं |
स्वामी रामतीर्थ केन्द्र, अंबाला रोड, सहारनपुर । यहां स्थित विशाल कक्ष सहारनपुर के सांस्कृतिक - बौद्धिक कार्यक्रमों का प्राण केन्द्र भी है। यहीं पर आपका भारतीय ज्योतिर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान, नवग्रह मंदिर, वेधशाला व प्लेनेटोरियम (planetarium ) भी अवस्थित है। |
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अभिरुचि |
ज्योतिष, ज्योतिर्विज्ञान, समाज सेवा। हिन्दी, उर्दू, संस्कृत आदि अनेकानेक भाषाओं के आप विद्वान हैं। |
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खेलकूद |
अपने यौवनकाल में पं. केदारनाथ निरंतर दस वर्षों तक फुलवारी आश्रम में स्थित अखाड़े में जाकर दंड लगाते रहे हैं। 1000 दंड बैठक लगाना आपके लिये अत्यन्त सहज रहा है। |
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लेखन |
अनेकों ग्रंथों के रचयिता एवं वेदचक्षु पत्रिका के संस्थापक संपादक । मां वैष्णों देवी पर लिखित आपकी शोधपूर्ण पुस्तक पर फिल्म भी बन चुकी है। ज्योतिर्विद्, चिन्तक, विचारक तथा लेखक प्रभाकर जी का अपना एक अत्यन्त समृद्ध पुस्तकालय है जिसमें आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कर (प्रथम एवं द्वितीय), स्वामी रामतीर्थ, महर्षि अरविन्द, स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी, काका कालेलकर की संपूर्ण रचनाओं के अतिरिक्त चारों वेद तथा वैदिक साहित्य, पुराण, रामायण, महाभारत के साथ-साथ ज्योतिष, आयुर्वेद, दर्शन, इतिहास और संस्कृति से संबंधित अनेकानेक पुस्तकों व पांडुलिपियों का दुर्लभ संग्रह है। केवल हिन्दू धर्म ही नहीं, विश्व के सभी प्रमुख धार्मिक ग्रंथों का संग्रह आपके पास है। आपके संग्रहालय में मुगलकालीन हस्तलिखित रामायण की प्रति ही उपलब्ध नहीं है अपितु भृगु संहिता भी आपके संग्रहालय की शोभा है। |
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पारिवारिक |
धर्म पत्नी - श्रीमती स्वर्णकांता जी पांच पुत्रियां - उमा, रमा, रेणुका, रचना और वैष्णवी । पुत्र - सर्वेश्वर |
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विशेष |
गणितीय व फलित ज्योतिष के प्रकाण्ड पंडित। आचार्य वराहमिहिर एवं कुतुब मीनार पर शोध आपका विलक्षण कार्य है। मां वैष्णोदेवी के अनन्य भक्त पं. केदारनाथ सौ से भी अधिक बार मां के दरबार की यात्रा कर चुके हैं। स्वामी रामतीर्थ आपकी प्रेरणा व शक्ति हैं। एक शोधकर्ता के रूप में आप देश-विदेश में अनेकों सुदूर, दुर्गम स्थलों की यात्रा करते रहे हैं। आपके पुस्तकालय में प्राचीनतम ग्रंथों की पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। आपके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किये गये विशिष्ट शोधकार्यों से प्रभावित होकर दूरदर्शन अनेक बार वृत्तचित्र बना कर राष्ट्रीय प्रसारण में दिखा चुका है। |