श्री योगेश छिब्बर - आध्यात्म की बहती अंतर्धारा
 
श्री योगेश छिब्बर किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं । महाराज सिंह कॉलेज, सहारनपुर में अंग्रेज़ी के प्रवक्ता श्री छिब्बर एक ऐसे कवि के रूप में अधिक चर्चित हैं जिनकी रचनाओं में प्रवाहित होने वाली अध्यात्म की अन्तर्धारा हमें भाव विभोर ही नहीं करती बल्कि सुकून भी देती है। उनकी क्षणिकायें जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथक नृत्यांगना व विश्व की सबसे युवा योगाचार्या प्रतिष्ठा शर्मा की कथक प्रस्तुतियों का कथानक बनती हैं तो वहीं योगेश छिब्बर का संदेश - "आस्था है तो बंद द्वार में भी रास्ता है" हज़ारों घरों, कार्यालयों, शो रूम्स की न केवल शोभा बढ़ा रहा है अपितु व्यथित हृदयों को आशा का संदेश भी दे रहा है।

श्री योगेश छिब्बर की रचनायें -

चिड़िया बम नहीं बनायेगी,   सांसों के वृन्दावन में,  हाथों में ताजमहल 
तुम अपनी प्यास जितने हो, 
आदि


 

श्री योगेश छिब्बर के रचना संसार की एक झलक  

जब-जब बाजे बांसुरी, रहे न मुझको ध्यान ।
गोपी हूं या बांसुरी, या मुरली की तान ॥

पंछी उड़ते पंख से, मैं उड़ती बिन पंख ।
जब मैं पी के संग हूं, मेरे पंख असंख ॥

प्रेम ख़रीदे प्रेम को, प्रेम प्रेम का मोल ।
दोनों पलड़े प्रेम रख, प्रेम प्रेम से तोल ॥

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर ।
पहुंची कोई और थी, लौटी कोई और ॥

एक बताशा मैं भई, पिया रूप का ताल ।
डूब-डूब पी-ताल में, घुल-घुल हुई निहाल ॥


कुछ क्षणिकायें

 

मेरी सांसों की किताब में
तुम लिखे हुए हो
मेरे हिसाब में ।
 

लो, हाथ तुम्हारा पकड़ा
ख़त्म हुआ हर झगड़ा ।
 

तुम्हारा हूं
इसीलिये
अब तक
नहीं हारा हूं।

 

मैं कहीं हूं
वो कहीं है
फ़ासला तो है
दोनों के बीच
मगर ’दूरी’ नहीं है।


सात जनम की
यही कहानी
मैं मछली
वो पानी ।

 

तुम जिस तरह
मेरे हो
बस, तुम्हीं उस तरह
मेरे हो।

इससे बढ़ कर सुख कहीं, पूरे जग में नांहि।
इक वंशी बन में बजे, इक बाजे मन मांहि॥

 ऐसे अंग लगाय लो, सब अंतर मिट जाय ।
पिया कौन से कौन मैं, कोई बूझ न पाय ॥

भरे भवन में राधिका, पी में गई समाय ।
जैसे ख़ुशबू बिन दिखे, ख़ुशबू में मिल जाय॥

कंठ लगा पी ने कहा, कुछ तो प्यारी मांग।
सदा रहो तुम मांग में, यही हमारी मांग ॥

जिस माखन से आ रही, सुध बिसराती गंध ।
समझो जूठा कर गये, उसको छोटे नंद ॥
 

कुछ टप्पे

जग रोक न पाएगा
मीरा नाचेगी
जब प्रेम नचायेगा


वो इतना प्यारा है
चांद कहे उससे
तू चांद हमारा है
 

छम-छम-छम बारिश है
माही, घर आ जा
हर बूंद सिफ़ारिश है