News Update from Saharanpur

7 March 2010

सहारनपुर में दो-दिवसीय सिद्धामृत सूर्यक्रिया योग शिविर शुभारंभ

सहारनपुर ७ मार्च : आज की भागमभाग वाली जिन्दगी हम सबने अपनी ही इच्छा से स्वीकार की है। पर अब  कुछ को दैनिक दिनचर्या में अनुभव हो रहे तनावों से छुटकारा चाहिये तो कुछ को शारीरिक व्याधियों ने घेरा हुआ है। तनाव जैसे रोगों के मामले में तो आधुनिक आयुर्विज्ञान ने भी हाथ खड़े कर दिये हैं ऐसे में योग की महत्ता बढ़ती ही चली जा रही है।  योग स्वयं में अत्यन्त व्यापक जीवन दर्शन है जिसकी असंख्य शाखायें - उपशाखायें हैं। ऊषाकाल में जब पूर्व दिशा से अरुणोदय हो रहा हो, उस समय भगवान्‌ भास्कर की जीवनदायिनी किरणों का रसपान करते हुए विभिन्न यौगिक क्रियाओं को सम्पन्न करना बहुत लाभदायक हो सकता है।  ऐसा ही एक दो-दिवसीय सिद्धामृत सूर्य क्रिया योग शिविर सहारनपुर में आरंभ हुआ।  महायोगी स्वामी बुद्धपुरी जी द्वारा परिभाषित सूर्यक्रिया योग का लाभ उठाने वाले अनेकानेक साधक जिनमें व्यवसायी, उद्यमी, व्यापारी, छात्र, गृहणियां, युवा, वृद्ध,  रोगी-निरोगी, चिकित्सक, अधिवक्ता,  अध्यापक आदि शामिल हैं, इस शिविर का लाभ उठाने के लिये सुबह ७ बजे गवर्नमैंट फील्ड में मौजूद दिखाई दिये।  इनको दीक्षित व प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया है स्वामी सूर्येन्दुपुरी व साध्वी योगाचार्या चैतन्या जी ने जो अब तक 75000 से भी अधिक साधकों को दीक्षित कर चुके हैं। M.Tech.  डिग्री धारक स्वामी सूर्येन्दु पुरी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे हैं पर अब पूर्ण समर्पण भाव से अमृतम्‌ अभियान चला रहे हैं।     

 स्वामी सूर्येन्दुपुरी द्वारा सूर्यक्रिया योग का प्रदर्शन व योगाचार्या चैतन्या जी द्वारा प्रशिक्षण

 

 

साध्वी चैतन्या - अमृतम्‌ की मुख्य प्रचारिका

स्वामी सूर्येन्दुपुरी - योगाचार्य

आयु की सीमाओं को तोड़ते हुए व्हीलचेयर पर चल कर आई हैं ये योगसाधिका

प्रसिद्ध शल्य चिकित्सक डा. सीमा अग्रवाल - योगाभ्यास करते हुए

 
   कंपनी बाग सहारनपुर में फल, पुष्प एवं शाक भाजी प्रदर्शनी
 

सहारनपुर (६ मार्च) :  कुछ वर्ष के अंतराल के बाद पिछले वर्ष से औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र, सहारनपुर (कंपनी बाग, सहारनपुर)  ने पुष्प प्रदर्शनी की उज्ज्वल परंपरा को पुनः आरंभ किया तो सहारनपुर की गंदगी से संत्रस्त जनता ने भी इस कार्यक्रम को हाथों हाथ लिया है और  इस प्रकार कंपनी बाग की ओर दौड़ी चली आने लगी है मानों कोई मेला लगा हुआ हो।  यह बात अलग है कि यहां पहुंच कर उन सब को निराशा ही हाथ लगती है जो पिछले कई वर्षों से इस आयोजन को देखते चले आ रहे हैं।  पहले जहां पचास से सौ के बीच में स्टॉल लगते थे व अनेकानेक उत्पादों का प्रदर्शन व विक्रय होता था, वहां अब गिनती के चार-छः स्टॉल रह गये हैं जिनमें देखने योग्य कुछ भी नज़र नहीं आता। संभव है अधिकारियों की प्राथमिकतायें बदल गई हों या स्टॉल का किराया इतना अधिक बढ़ा दिया गया हो कि कोई अपने उत्पादों के प्रदर्शन में रुचि ही नहीं लेता। 

सहारनपुर व मुज़फ्फरनगर जनपदों को मिला कर बने सहारनपुर मंडल में मंडलीय स्तर पर आयोजित होने वाले इस वार्षिक आयोजन में इस बार केवल २५० व्यक्तियों व संस्थाओं ने अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं व कुल प्रविष्टियों की संख्या १५४८ रही।   सदाबहार एवं शोभाकार (ornamental plants), सकुलेंट, मौसमी फूलों के गमलों, गुलाब एवं डहेलिया आदि के अनेकानेक किस्म के पौधों का प्रदर्शन किया गया है।   इसके अलावा कलात्मक पुष्प सज्जा, कृत्रिम पुष्प सज्जा, व फल संरक्षण श्रेणी के अन्तर्गत जैम, स्क्वैश, अचार, चटनी, सॉस, मुरब्बा, शरबत एवं कैंडी आदि  का भी प्रदर्शन किया गया है।

 

इस आयोजन में निजी प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान, राजकीय कार्यालय व सेना अधिकारियों के विभिन्न आकार के लॉन, कंपाउंड, उद्यान व गृह वाटिकाओं (kitchen garden) की भी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।

 

मंडलायुक्त सुरेश चन्द्रा व जिलाधिकारी आलोक कुमार के द्वारा संयुक्त रूप से इस प्रदर्शनी का उद्‌घाटन अपराह्न तीन बजे हुआ  और कल ७ मार्च को अपराह्न पुरस्कार वितरण समारोह के साथ ही इस आयोजन का समापन किया जायेगा।   

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कामकाजी महिलाओं द्वारा विचार गोष्ठी

सहारनपुर (५ मार्च) : स्थानीय महाराज सिंह कॉलेज के सभागार में आयोजित विचार गोष्ठी में "परिवार में महिलाओं के कामकाजी होने से पड़ने वाले प्रभावों की विशद्‌ चर्चा की गई और महाविद्यालय की अनेकानेक प्रवक्ताओं में सभी ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि भले ही कामकाज के कारण महिलाएं परिवार में अपेक्षाकृत कम समय दे पाती हैं, पर गुणवत्ता की दृष्टि से देखें तो कम समय में भी उनका योगदान उन महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है जो पूरा समय घर को देती हैं।

गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डा. पूनम त्यागी ने कहा कि कामकाजी महिलायें मानसिक, वैचारिक, सामाजिक, आर्थिक आदि सभी क्षेत्रों में प्रभावित करने की स्थिति में रहती हैं। अपने आत्मविश्वास के बल पर ये महिलाएं न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज को भी उल्लेखनीय योगदान देती हैं। वहीं डा. दीपा चौहान का मानना था कि कामकाजी महिलाओं का शिक्षित होना परिवार के मानसिक व बौद्धिक स्तर को निश्चित रूप से प्रभावित करता है। एक पुरानी कहावत भी है कि यदि आप एक बालक को पढ़ाते हैं तो एक पीढ़ी सुधरती है पर बालिका को शिक्षित करते हैं तो सात पुश्तें संवर जाती हैं। डा. पूनम यादव ने स्वीकार किया कि कुछ पाने के लिये कुछ न कुछ खोना भी पड़ता है। उन्होंने कहा व्यावसायिक जिम्मेदारियों के चलते महिलाओं को घर व बाहर की दोहरी जिम्मेदारी वहन करनी पड़ती है जिससे वह स्वयं भी उपेक्षित अनुभव करती है और थोड़ी बहुत उपेक्षा परिवार को भी सहनी पड़ती है। यदि परिवार के सभी सदस्य कामकाजी महिला के साथ सहयोग करते हैं तो सब ठीक हो जाता है पर अगर महिला से यह अपेक्षा रखें कि घर का प्रत्येक कार्य वह स्वयं करे और उसके बाद अपनी नौकरी का भी कार्य संभाले तो स्थिति उस महिला के लिये और बाकी सब के लिये भी कष्टकर हो सकती है।

जहां डा. तसनीम अशरफ का विचार था कामकाजी महिलाएं बहुत अच्छा तालमेल मिला कर चलती हैं जिससे जीवन में सामंजस्य में कोई कमी नहीं आती है वहीं सोनिया मित्तल ने भी इस तथ्य से इंकार नहीं किया कि कामकाजी महिला को हर पहलू को ज्यादा अच्छे ढंग से निभाना पड़ता है और यह कठिनाई उसे झेलनी ही पड़ती है। सबके विचारों को समाहित करते हुए गोष्ठी की अध्यक्षा डा. स्नेहलता का कथन था कि "धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष" - इन चारों पुरुषार्थों में अर्थोपार्जन वाले पुरुषार्थ में महिला द्वारा सहयोग मिले तो परिवार बड़ी से बड़ी समस्या को पार पा लेता है। कामकाजी महिलाओं में आत्मविश्वास अधिक होने के कारण निर्णय क्षमता भी बेहतर होती है। अंत में गोष्ठी की आयोजक डा. अरुण गर्ग ने कहा कि कामकाजी महिला अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक विस्तार देते हुए जीवन को प्रेय से श्रेय की ओर ले कर जाती है। आज हमारा समाज जिस तेजी से उन्नति पथ पर अग्रसर है, उसमें महिलाओं के द्वारा कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

भगवान का धन्यवाद कि हम सहारनपुर में रहते हैं !

क्या आपने पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं को, बच्चों को दो-दो मील से पानी की बाल्टियां ढोकर लाते हुए देखा है?  राजस्थान में, महाराष्ट्र में सिर पर तीन-तीन मटकियां बचपन से ही सिर पर लेकर चलने का अभ्यास वहां की लड़कियों को हो जाता है।  कुएं पर जाना, नहाना, कपड़े धोना, बर्तन मांजना, फिर खाना बनाने के लिये घड़े - मटकियां सिर पर ढोकर लाना - यह सब उनकी दिनचर्या का अभिन्न अंग है।  सहारनपुर वासी बड़े भाग्यवान हैं कि उनको इतना कठोर जीवन नहीं जीना पड़ता पर शायद इसी लिये उनको पानी की कीमत का एहसास नहीं है।  सरकारी नलकों में पानी बहता रहता है, किसी को टोंटी बंद करने की भी फुरसत नहीं है। पानी के अंडरग्राउंड पाइप ओवरलोडेड वाहनों से या सड़क की मरम्मत के दौरान गेंती की चोट से टूट जाते हैं और फिर शुरु हो जाता है पानी की बरबादी का अनवरत सिलसिला। छः महीने तक भी कोई सुध नहीं लेता उन पाइप को ठीक करने की।

ऐसा ही एक दृश्य कचहरी पुल के निकट रेलवे टैंक का दिखाई देता है।  आस-पास के लोगों से पूछो कि भई ये पानी कब से बह रहा है तो कहते हैं - "हमने तो जब से होश संभाला है, ऐसे ही बहते हुए देख रहे हैं।"   पिछले हफ्ते तक तो सिर्फ ओवरफ्लो होने पर ही पानी बहता रहा और इतना बहा है कि दस-बीस भैंस भी पानी की धार के नीचे खड़ी होकर अपने तन की ज्वाला शांत करती रहें तो कम न पड़े।  अब तो ओवरफ्लो करने की भी जरूरत नहीं।  टैंक की तली में से भी पानी बह रहा है और बहे जा रहा है।  इसी दृश्य से विचलित होकर हमने रेलवे स्टेशन अधीक्षक से मुलाकात की और उनसे मांग की कि पीने योग्य पानी की इतनी बरबादी को रोकने हेतु आवश्यक उपाय तुरन्त करें।  

 द सहारनपुर डॉट कॉम बहुत महत्वपूर्ण वेबपोर्टल है : अमर उजाला
      द सहारनपुर डॉट कॉम  के द्वारा सहारनपुर की वैश्विक छवि निर्माण के प्रयासों को प्रिंट मीडिया ने भी सराहना आरंभ किया है।  अपनी 30 जनवरी की रिपोर्ट "सहारनपुरिया" हैं तो मिलते हैं नेट पर" में द सहारनपुर डॉट कॉम को सहारनपुर वासियों की अपनी सोशल नेटवर्किंग  साइट का दर्जा दिया है। "इसी पहलू के मद्देनज़र स्थानीय स्तर पर कम्यूनिटी एवं सोशल नेटवर्किंग  सेवा सुलभ कराने वाली नई-नई वेबसाइट लॉंच हो रही हैं।  इस फेहरिस्त में कुछ ही समय पूर्व द सहारनपुर डॉट कॉम साइट को इस लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा सकता है कि इस पर शहर और देश के अन्य स्थानों से लेकर विदेश तक के लोग ई-मेल से राय अभिव्यक्त कर रहे हैं। इससे अलग-अलग जगह और काम से जुड़े लोगों को अपनी बात बेहतर ढंग से सामने लाने का मंच मिला है। नेट यूज़र संजय और अनिल कहते हैं कि यह सचमुच शानदार है। तकनीक के बेहतर इस्तेमाल ने दूरियां मिटा दी हैं और दिलों को जोड़ दिया है।  यह सिलसिला बढ़ना चाहिये।"

"सुनो सहारनपुर" स्तंभ में अमर उजाला की एक अन्य रिपोर्ट "और अम्मा ने घूम ली पूरी दुनिया" (6 फरवरी) द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा आरंभ किये गये सृजनात्मक अभियान "अम्मा" की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहती है - "तकनीक के पंखों पर सवार जज़बात गांव से शहर और अब तो परदेस तक अपनी छाप छोड़ रहे हैं।  प्रख्यात साहित्यकार प्रो. योगेश छिब्बर की लेखनी से चंद रोज़ पहले अम्मा यादि मां के प्रति समर्पित कुछ भावनायें उभरीं। इन पंक्तियों को उन्होंने अपने परिचित सुशान्त सिंहल को एस.एम.एस. कर दिया, जो वेबसाइट द सहारनपुर डॉट कॉम के जरिये दुनिया भर में फैले सहारनपुरपुरियों को जोड़ने की मुहिम चला रहे हैं। सुशान्त ने इन पंक्तियों को  वेबसाइट पर हाइलाइट कर दिया।  बस, फिर क्या था, शुरु हो गया यह अनूठा सफर जो आज तक जारी है।  मेरठ, बरेली, गाज़ियाबाद, दिल्ली और मुंबई से होते हुए ये पंक्तियां खाड़ी देश और यू.एस.ए. तक का सफर तय कर आई हैं।  जो इन्हें पढ़ता है, अम्मा की याद और प्यार को समर्पित अपनी भी चंद पंक्तियां जोड़ देता है।"

ऐसा नहीं है कि द सहारनपुर डॉट कॉम केवल साहित्य व संस्कृति के क्षेत्र में ही सक्रिय योगदान दे रही है। अभी २० फरवरी को, पानी की बरबादी रोकने हेतु रेलवे को दिये गये ज्ञापन की भी रिपोर्ट अमर उजाला और हिन्दुस्तान समाचार पत्रों में  प्रकाशित हुई हैं।  उल्लेखनीय है कि जीवन के प्रमुख स्रोत जल की बरबादी रोकने के लिये द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा जो पहल की गई उसे नगर की अनेकानेक संस्थाओं से मुखर योगदान मिला है।  आई.आई. ए.,  सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, प.उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल, लॉयंस क्लब, रोटरी क्लब, परचम, अदाकार, NIIT, Crazy Green के विभिन्न प्रतिनिधियों ने द सहारनपुर डॉट कॉम की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिला कर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय  दिया है। (पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें) ।

द सहारनपुर डॉट कॉम ने रेलवे को कहा "पानी की बरबादी तुरंत रोकें" ।

सहारनपुर (२० फरवरी) "सहारनपुरवासी में पानी को लेकर संघर्ष की स्थिति आने लगी है और हमारा रेलवे विभाग इतना पानी एक दिन में बर्बाद किये चले जा रहा है जितना पानी एक मोहल्ले की एक महीने की जरूरत पूरी कर सकता है। रेलवे अधिकारियों द्वारा पीने योग्य पानी की इस प्रकार की बरबादी न जाने कब से चली आ रही है जिसे अब और नहीं सहा जा सकता है।"  द सहारनपुर डॉट कॉम के संस्थापक सुशान्त सिंहल के साथ आये सभी सदस्यों ने आज सहारनपुर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को ज्ञापन देते हुए कचहरी पुल के निकट स्थित रेलवे ओवरहैड टैंक को तुरन्त ठीक कराने की मांग की। 

द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा दिये जा रहे ज्ञापन को प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं पोर्टल के प्रमुख सदस्य संदीप शर्मा ने स्टेशन अधीक्षक व उपस्थित समुदाय के सम्मुख पढ़ा ।  ज्ञापन में कहा गया है कि गर्मियों में जब सहारनपुर वासी एक-एक बूंद पानी को लेकर तरसते हैं और पानी की किल्लत को लेकर खूनी संघर्ष के समाचार प्रकाशित हो रहे हैं, ऐसे में रेलवे के टैंक से हज़ारों गैलन पानी प्रतिदिन व्यर्थ कर दिया जाना आपराधिक कृत्य है।  ज्ञापन में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई है कि सहारनपुर में भूजल का स्तर एक वर्ष में ही एक मीटर से अधिक नीचे चला गया है। सहारनपुर में २०-३० फीट की गहराई पर मीठा, साफ पानी उपलब्ध हो जाया करता था पर अब पचास फीट तक भी पानी के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग की योजना को अमल में लाये जाने की जरूरत पर भी द सहारनपुर डॉट कॉम ने बल दिया है।   

पोर्टल के संपादक सुशान्त सिंहल ने स्टेशन अधीक्षक कपिल शर्मा का आह्वान किया कि वह स्वयं को भी द सहारनपुर डॉट कॉम के द्वारा नगर की समस्याओं के समाधान के लिये छेड़े गये इस अभियान का एक अभिन्न अंग ही समझें और पूरे उत्साह से नगर की समस्याओं के निदान में योगदान दें।   उल्लेखनीय है कि द सहारनपुर डॉट कॉम ने सहारनपुर की विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु नगरवासियों के मध्य जन-जागृति का अभियान छेड़ा हुआ है।  नगर की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने की इस वैबपोर्टल की कोशिश को समर्थन देने के लिये सहारनपुर की अनेकानेक संस्थायें सामने आ रही हैं। स्टेशन अधीक्षक को दिये गये ज्ञापन में जहां एक ओर आई.आई.ए., सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, पश्चिमी उ. प्र. उद्योग व्यापार मंडल, जिला युवा व्यापार मंडल, लॉयंस क्लब सहारनपुर सैंट्रल, एस.डी. चैरिटेबिल ट्रस्ट, रोटरी क्लब सहारनपुर कॉंटिनेंटल, परचम की डा. कुदसिया अंजुम, ने हस्ताक्षर किये हैं वहीं पर्यावरण के क्षेत्र में चंबा व ऋषिकेश में अभूतपूर्व कार्य करती चली आ रही संस्था क्रेज़ी ग्रीन’  आरंभ से ही द सहारनपुर डॉट कॉम के कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है। 

द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा सहारनपुर वासियों को एकजुट करने की कोशिश रंग ला रही है, यह इसी तथ्य से स्पष्ट होने लगा है कि दोहा क़तर से सुशील कुमार ने, बरेली से मीनाक्षी वर्मा ने भी वैब पोर्टल को इस कार्य में अपना नैतिक सहयोग प्रदान किया है।  शुभकामनायें देते हुए पद्मश्री भारत भूषण जी ने अपनी भावना कुछ यूं व्यक्त की है - " टिमटिमाते दीप की / नन्हीं सी लौ कहां डरे / जग भर में फैले / अनन्त अंधियार से / जीवन में सफलता ही / चूमेगी चरण प्यारे / थोड़ा सा ऊंचा रहें / जीत और हार से। आगे लिखते हुए भारत भूषण जी कहते हैं -   "अपने शहर की शक्ल संवारने के अहसास में मेरी नैतिक भागीदारी आप दर्ज कर सकते हैं।  एक पूर्व निश्चित कार्यक्रम के कारण दिल्ली जाना पड़ रहा है वरना २० फरवरी को आपके जागृति एवं दायित्वबोधी अभियान में स्टेशन पर पहुंचने की ईमानदार कोशिश करता।"

द सहारनपुर डॉट कॉम के संस्थापक संपादक सुशान्त सिंहल के नेतृत्व में स्टेशन अधीक्षक को ज्ञापन देने वालों में आई.आई.ए. के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आर.पी. गुप्ता, सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के महामंत्री विवेक मनोचा, पश्चिमी उ.प्र. व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैलेन्द्र भूषण गुप्ता, क्रेज़ी ग्रीन के अजय सिंहल, डा. आदित्य राठी, मौ. शहाबुद्दीन, संजीव शर्मा, रोमी सचदेवा, माधवी सिंहल, संजीव अग्रवाल, अदाकार ग्रुप के संदीप शर्मा, परचम की डा. कुदसिया अंजुम, जिला युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय भसीन, कंप्यूटर इंजीनियर उदय बैनर्जी, रोटेरियन संजय मित्तल,  मौ. सऊद आदि शामिल रहे। 

 
 

School & College Campus

M S College celebrates FOUNDER'S WEEK

Babu Maharaj Singh Ji, the noted lawyer and great philanthropist who gave away all of his property to give shape to his dream of having a Science Degree College in Saharanpur is being paid a rich tribute by the beneficiaries of his realised dream. Starting from 22nd January, various competitions and cultural events (dances, singing, cricket match, quiz and poetry recital, debate and Kavi Sammelan) have been  organised. Taking the occasion to new heights, athletics, rangoli and mehandi competition, flower / flower pot decoration competition, slogan writing competitions were also planned. Some indoor games also were scheduled during Founder's Week -which is a misnomer since various events had commenced from 22nd Feb. and continued till 25th of Feb.

PLEASE CLICK FOR PICTURE GALLERY OF THE VARIOUS EVENTS.

Literary World

24 Caret released.
 
The
pharma distributor emerges as a philosophical poet

Saharanpur has something in its environment that serves as a catalyst for the people of this place to venture into literary world.  Rtn. Satish Thakral, known as a wholesale pharmaceutical distributor till date, published his maiden collection of poetry - "24 Caret" which was released in a Rotary Club public meeting attended by almost everyone belonging to the literary circle of Saharanpur. 

Satish Thakral's  24 Caret is a collection of verses of different shades and styles. While some of them are romantic many others are philosophical and spiritual.  Some of them follow a narrative style.  "24 Caret is a measurement to describe the purity of gold. I leave it to the readers to decide even this collection of poetry can rightfully be described as 24 caret or not.  In any case, my poetry may be adjudged weak on the poetric expression but you will find it thought provoking to say the least."

The noted poet R.P. Shukla advised those desirous to be the devotee of Goddess Saraswati saying that such people should keep on writing without feeling disappointed with the criticism of what he has has been able to write.  When we continue to write, our expression improves with words starting to flow quite naturally and settling themselves at the right place as if automatically.  A river of thoughts and feelings soon starts flowing within us and we merely have to put it down on paper. 

Being lauded for his haiku poetry which he started writing just a few months ago, R. P. Shukla remembered those days when he used to tear off whatever he wrote feeling apprehension of ridicule or criticism.  Gradually he mustered the courage to show his write ups to some of his nearest friends. 

Yogesh Chhibber, congratulating Satish Thakral on some of the thought provoking poems quoted by him, said that a poet lives in all human beings which awaits the right occasion to express and assert itself.  Joyously and amid thunderous applause, he referred to Saharanpur as the literary capital of western U.P. - a self evident fact in view of the large number of literary activities going on here.

Before the release of the book, Rtn. Pawan Makkar, President of Rotary Club Saharanpur welcomed the guests, fellow rotarians and their families.  Dr. Virendra Azam conducted the program in his befitting literary style.

     

Trade & Industry

New branch of Shivalik Bank is opening on 8th March 2010.

Shivalik Mercantile Coop. Bank Ltd. is going to have one more branch in Dist. Saharanpur - this time Deoband is going to benefit with a different banking experience.  Shivalik Bank is all set to make this new branch fully functional with a great pomp and show by the end of this month. 

It may be noted that Shivalik Bank, over the last decade, has defined customer service afresh  - taking banking facilities at the door step of its customers.  All three branches of Shivalik Bank are fully computerised, air-conditioned, filled with background music and manned with eager to serve staff.   

Social Activities

Saharanpur's Rotary Club restores smile on the faces of children

Plastic Surgery arranged for deformed children with help from HIHT DDN

Saharanpur (20 Feb.) Rotary Club Saharanpur Continental and HIHT have together worked to bring never-seen smile on the faces of 41 children.  These children, suffering from congenital deformity (cleft lips, cleft palate ) have been successfully operated upon by the plastic surgeons at HIHT, Jolly Grant, Dehradun.  The parents are full of gratitude towards the hospital and the Rotary Club for their exemplary sense of service to the mankind and that too without charging even a single paisa from the patients.  The cost of medical examination, stay, surgery and post-op have been borne by either HIHT or Rotary Club Saharanapur Continental.

It may be recalled here there 53 families had attended the examination camp organised by local Club in which a team of Himalayan Institute of Hospital Trust had come all the way from Jolly Grant, Dehradun and had admitted 43 children for plastic surgery for cleft lips and cleft palates.   The children ranging from 5 months to 14 years of age who have undergone the surgery successfully would now be able to lead a normal life, sighed with relief and a sense of exaltation Rtn. Vivek Manocha and Rtn. Anil Madaan - Chairman Advisory Board and Club President respectively. 




Dr. B.P. Singh, Jr. Resident while talking to The Saharanpur Dot Com, described various possible reasons of the cleft syndrome. "Expectant mothers being exposed to x-rays radiation or some potentially dangerous medications like antibiotics are found to deliver malformed babies who suffer from one or the other kind of deformity. Some other causes may be malnutrition, under-nutrition of the mother or improper intakes/ life style. In fact, despite great progress achieved by medical science, many secrets of the life processes are very imperfectly understood by the experts till date."


Researches have revealed that it is always good for the expectant mothers to play safe and never take any medicine during pregnancy for minor self-limiting problems like headache or nausea. Potentially dangerous medicines include those which we take for nausea, sleeplessness, stimulation, depression etc. Antibiotics may also prove very dangerous and x-rays are also well known health hazards. X-rays can be extremely dangerous during the initial months of pregnancy when the formation of baby takes place.


 

Dr. Sanjay Dvivedi & Dr. Manu Rajan - Plastic Surgeons and professors at HIHT who have performed all these 41 surgeries were all praise for the Rotary Club Saharanpur.  "It is a rare phenomenon where the young members of a club are so enthusiastic to help others and are feeling so much happiness for being able to render this much help to the parents of these unfortunate children."  "A deep sense of inner satisfaction has today enveloped us. We feel that today we have been able to do something worthwhile for the society."   Parents of the ailing children who came to the camp with their bags and baggage for one week stay at the hospital, echoed their feelings of sincere gratitude towards the Rotary Club Saharanpur Continental. Various club members had found them out on their own and offered much needed help for their children.

 

 कंपनी बाग सहारनपुर को पर्यटन स्थल बनाने के प्रयास
 

Cultural Programs

 

Religion & Spirituality

     

 

Misc