राहुल गांधी को फैक्स भेज कर मेरठ-सहारनपुर डबल-ट्रैक और हाई कोर्ट बैंच मांगी !
सहारनपुर : ७ जून : द-सहारनपुर डॉट कॉम ने राहुल गांधी को फैक्स भेज कर मांग की है कि मेरठ से सहारनपुर तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जाये और मेरठ में इलाहाबाद उच्च-न्यायालय की बैंच स्थापित की जाये। द-सहारनपुर डॉट कॉम के संपादक सुशान्त सिंहल ने राहुल गांधी को विश्वास दिलाया है कि यदि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता की इन दशकों पुरानी मांगों को पूरा करने में सफल रहते हैं तो खतौली, मुज़फ्फरनगर, देवबन्द, सहारनपुर, रुड़की, हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून से लेकर अंबाला तक की एक करोड़ से अधिक शहरी व ग्रामीण आबादी उनका व कांग्रेस का गुणगान करेगी और इन क्षेत्रों की बीसियों लोकसभा - विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का दबदबा हो जायेगा।
द-सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को भेजे गये फैक्स में सुशान्त सिंहल ने आगे लिखा है कि इस मार्ग पर चलने वाली अनेकानेक रेलगाड़ियां, इकलौते ट्रैक पर एक दूसरे को मार्ग देने के कारण स्थान-स्थान पर रोकनी पड़ती हैं और इस कारण अत्यन्त विलंब से चलती हैं। यदि रेलवे को व्यापारिक बुद्धि से संचालित किया जा रहा होता तो जनता को डबल-ट्रैक व विद्युतीकरण की मांग की जरूरत नहीं होती, रेलवे अपने खुद के हित में यह कार्य वर्षों पूर्व कर चुकी होती। यद ऐसा नहीं हो पाया तो केवल इसलिये क्योंकि रेलमंत्री के रूप में जो भी आते हैं वह बिहार और बंगाल से आगे कुछ देख ही नहीं पाते। फैक्स में यह भी कहा गया है कि खुद गांधी परिवार भी यू.पी. के बारे में सोचता है तो अमेठी और रायबरेली के विकास से आगे कुछ सोच ही नहीं पाता। यदि ऐसा न होता तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति बहुत बेहतर होती। उन्होंने राहुल गांधी का आह्वान किया है कि यदि उनकी वास्तव में इच्छा है कि यू.पी. में कांग्रेस को अपना खोया हुआ जनाधार वापिस मिले तो उनको पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस मांग को पूरा करने के लिये हर-संभव प्रयास करना चाहिये क्योंकि ऐसा करना सिर्फ जनता के व रेलवे के हित में ही नहीं है बल्कि कांग्रेस के अपने विष्य के लिये भी बहुत लाभकारी होगा।
हाई कोर्ट बैंच की मांग के समर्थन में आगे आते हुए द सहारनपुर डॉट कॉम ने अपने फैक्स में कहा है कि यह घोर अन्याय है कि न्याय पाने के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश वासियों को सैंकड़ों मील की यात्रा करके इलाहाबाद तक जाना पड़े। पिछले अनेक दशकों से चल रहे इस जन-आंदोलन को इसकी स्वाभाविक परिणति तक पहुंचा कर राहुल गांधी जन-जन के हृदय सम्राट बन जायेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।
भारत चीन रिश्तों को सुधारेगा योग -चेन फेंग्हुआ - अध्यात्मिक रिश्ता जोडकर चीनी शिष्टमंडल विदा
(सहारनपुर 27 मई) भारतीय योग को जानने के बाद हमारा अध्यात्म मे विश्वास गहराया है और अब मैं स्वयॅं एक ईश्वर में विश्वास करती हूं। हमारे लिये योग अब एक्सरसाइज (exercise) नहीं बल्कि आर्ट आफ लाइफ (art of life) हैं यानि ‘योगा रिमेन्स विद अस इविन आफ्टर फिजिकल डेथ’ (Yog remains with us even after physical death) | ये विचार हैं मोक्षायतन इंटरनेशनल योगाश्रम में यज्ञ तिलक और सामूहिक ध्यान के साथ भारतीय आतिथ्य से भाव विभोर हुये चीनी शिष्टमंडल की नेता चेन फेग्हुआ के, जो कहती है कि आधुनिक समय में योग भले ही अमेरिका के माध्यम से चीन पहुंचा लेकिन हम खुशकिस्मत हैं कि अब हम सीधे भारत से योग विद्या सीख रहे हैं जो योगा साइंस की मदरलैंड है, एंड अवर गुरू इज भारत भूषण, ‘द जैम आफ इंडिया’ (The Gem of India) । माथे पर तिलक, कलाई में रक्षा सूत्र और हथेलियों पर गुरू के द्वारा आशीष सूचक (as a blessing) दिया गया रूद्राक्ष और आंखों मे गहरी आनंदमिश्रित तृप्ति - ऐसा दृश्य था आज अपने देश चीन के लिये विदा होने से से पूर्व आश्रम के ध्यान कक्ष में गुरू के साथ बैठे चीनी योग साधकों व साधिकाओं का।
चीनी साधिकाओं ने योग सीखने के साथ साथ योग और नृत्य के रिश्ते की गहराई को ही नहीं समझा बल्कि चीन में नृत्य कक्षायें शुरू करने के साथ वहां के नृत्य जिज्ञासुओं के लिये कथक डांस की ड्रेस और घुंघरू आदि भी अनिवार्य करने के लिये घुंघरू बांधना और कथक ड्रेस पहनने का सलीका महिलाओं के साथ साथ पुरूषों ने भी डांस गुरू प्रतिष्ठा शर्मा से सीखा। कपडों में महिला योग साधकों की पहली पसंद साडी रही।
गुरू भारत भूषण ने कहा कि नक्काशी का काम सहारनपुर की विश्वप्रसिद्ध विशेषता है, हम योग साधना के माध्यम से साधकों के मन मस्तिष्क पर नक्काशी करते हैं तो यहां के कलाकार लकडी पर। इसी लिये आश्रम की ओर से वरिष्ठ साधकों डी के बंसल, धीरज सारस्वत, राम राजीव सिंघल, मनीष कच्छल व मनीष कालडा ने मन पर नक्काशी करने वाला ग्रंथ गीता भी सुंदर नक्काशी के बक्सों में रख कर शिष्टमंडल के सभी सदस्यों को भेंट किया।
विदा होने से पहले चीन में भारतीय कोआर्डिनेटर विशाल शर्मा ने बताया कि चीन के विन्जाहो सिटी में सबसे बडा पुलिन योग स्कूल अब मोक्षायतन इंटरनेशनल योगाश्रम की शाखा के साथ साथ भारत कालेज आफ परफार्मिंग आर्ट्स BCPA का केंद्र भी होगा जहां नियमित भारत योग व डांस कक्षाओं के अलावा अल्पकालिक योग शिक्षक कोर्स इसी तर्ज पर दुसरे शहरों मे भी शुरू किये जायेंगे और हम यहां के आयुर्वेद व पंचकर्म को भी चीन में लोकप्रिय बनाने का काम करेंगे। भारत योग केंद्र की संचालिका चीनी महिला चेन फेंग्हुआ मानती हैं कि सिर्फ भौगोलिक सीमाओं में ही नहीं अध्यात्मिक सीमाओं में भी चीन आज भी भारत के ही सबसे करीब है और योग गुरू भारत भूषण के आश्रम ने जो कोर्स भारतीय योग विद्या का विदेशियों के लिये तैयार किया है उसे किसी भी आस्था के व्यक्ति के लिये स्वीकार करना मुश्किल नहीं है। चेन फेंग्हुआ ने बताया कि चीन में मोक्षायतन इंटरनेशल योगाश्रम के भारत योग टीचर्स कोर्स के मासिक बैच शुरू होने से उत्साह जनक परिणाम सामने आ रहे हैं और लोग भ्रम की स्थिति से निकल कर अब इस तरफ सही भारतीय योग सीखने के लिये दौडने लगे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चीन में योग के प्रति बढती आस्था से भारत चीन रिश्तों में गुणात्मक सुधार आयेगा, वह महसूस करती हैं कि अध्यात्मिक पकड राजनीतिक पकड से बहुत गहरी होती है।
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प्रिय मित्रों, |
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Save Paondhoi Campaign : DM Alok Kumar leads from the front |
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Even the Gods feel helpless seeing the horrible condition of Paondhoi river |
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Is there an end of the mud? DM and other volunteers in gloomy mood |
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Is there anyone sensible enough here who would take the responsibility of keeping the river clean ? |
सहारनपुर में बाइकर्स गैंग की धूम
सहारनपुर में आजकल बाइकर्स गैंग द्वारा सड़क चलती महिलाओं के गले से सोने की चेन
लूटने की घटनायें अब हर रोज़ होने लगी हैं और पुलिस प्रशासन को समझ ही नहीं आ
रहा है कि इतने बड़े शहर की इत्ती सारी सड़कों पर दनदनाती घूम रही काली पल्सर
मोटर साइकिलों में से कौन कौन सी अपराधियों को लेकर घूम रही हैं! हमें लगता है
कि यदि पुलिस प्रशासन में अपराधियों को पकड़ने की तनिक सी भी इच्छा हो तो ऐसा
नहीं है कि इस समस्या का निदान नहीं हो सकता। वाहन विक्रेताओं व आर.टी.ओ.
कार्यालय के अभिलेख व प्रताप मार्किट में लगने वाले मोटर साइकिल बाज़ार में से
ही इन अपराधियों को पकड़ने के लिये आवश्यक सुराग मिल जायेंगे। यदि पुलिस
अधिकारियों को कंप्यूटर का सदुपयोग करना आता हो तो इन अभिलेखों में से दो दिन
के भीतर ऐसे व्यक्तियों को चिह्नित किया जा सकता है जिनसे व्यापक पूछताछ की
जानी चाहिये। पर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। ज्यादा कुछ पूछो तो जवाब मिलता
है कि पुलिस के पास जादू की कोई छड़ी तो है नहीं। हमारा सुझाव तो यही है कि एक
टास्क फोर्स गठित की जाये जिसमें कुछ कंप्यूटर प्रोग्रामर को भी शामिल कर लिया
जाये। ये लोग अभिलेखों को विभिन्न आधारों पर फिल्टर करके ऐसे व्यक्तियों की
लिस्ट बनायें जो संदेहास्पद हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त हर रोज़ शाम को सड़कों पर
भी काले रंग की मोटर साइकिलों को रोक कर उनके चालकों की स्क्रीनिंग की जाये।
इनमें जो व्यापारी और नौकरी पेशे वाले हों उनको जाने दिया जाये और बचे हुए
बेरोज़गार युवकों से पूछा जाये कि मोटर साइकिल व महंगे - महंगे मोबाइल लेकर
घूमने लायक पैसे कहां से आये थे ? जो संतोषजनक जवाब देने में असमर्थ हों उनसे
व्यापक पूछताछ की जानी चाहिये।
टूटी फूटी सड़कें मौत का पैगाम
अभी दो-तीन दिन पूर्व नागल-देवबन्द मार्ग पर मौजूद भयानक गड्ढों के कारण एक टेंपो खाई में पलट गया और उसके तुरंत बाद उसी गढ्ढे के कारण रोडवेज़ की एक बस पलट कर उसी खाई में और उसी टेंपो पर जा गिरी। टेंपो में १५-१६ सवारियां ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थीं। इससे पहले कि वह पलटे हुए टेंपो में से जिन्दा निकल पातीं, पलटी हुई बस ने उन बेचारों का कचूमर निकाल दिया। सात तो मौके पर ही स्वर्ग सिधार गये और बाकी गंभीर हालत में हैं। समाचार पत्रों और मीडिया में प्रश्न उछाला जा रहा है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? इस प्रश्न के उत्तर में हमारा एक प्रतिप्रश्न है ? यदि सहारनपुर के आयुक्त, जिलाधिकारी, डी.आई.जी. और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को लखनऊ से यह फैक्स प्राप्त हो कि माननीया मुख्यमंत्री का सहारनपुर आगमन दो दिन बाद होना निश्चित हुआ है और वह नागल से देवबन्द सड़क मार्ग से जायेंगी तो इस सड़क को ठीक करने हेतु आपात्कालीन पग उठाये जायेंगे या नहीं? इस सड़क को तुरंत ठीक करने के लिये आदेश किसके हस्ताक्षर से पारित होंगे? सड़क की मरम्मत हेतु बजट किसके आदेश से जारी किया जायेगा ? बस, जो अधिकारी इन आदेशों को पारित करने हेतु सक्षम है, वही इस मार्ग पर होने वाली समस्त दुर्घटनाओं और मौतों का व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार है। हमारे प्रदेश में अधिकांश अधिकारी केवल तब कार्य करते हैं जब उन को माननीय मुख्यमंत्री के कोप का भय सता रहा हो, अपनी नौकरी जाने का, सस्पेंड अथवा बर्खास्त किये जाने का भय हो। यदि ऐसा कुछ भय हो तो वह गलत कार्य करने के लिये भी रास्ता ढूंढ निकालेंगे। पर अगर मुख्यमंत्री का वरद हस्त उनके सिर पर हो तो फिर लंबी तान कर सोते रहते हैं। इस दृष्टि से देखें तो इस प्रकार की कार्य संस्कृति को प्रश्रय देने वाले हमारे चुने गये जन-प्रतिनिधि भी इन मौतों के लिये उतने ही जिम्मेदार हैं।
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