एक्सीडेंट
माफ करना ’सर’
(कश्मीर सिंह)
घर से भागी लड़की का खत
(प्रो. योगेश छिब्बर)
सारा मुल्क हाथ धोरहा है।
(डा. वीरेन्द्र आज़म)
Sare Jahan ka Dard
ऐसे पहुंचे हम मुंबई
(सुशान्त सिंहल )
Amnesia
New Year Resolution
(विनोद कुमार गर्ग)

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कहानी चाहे बाबा - दादी गोद में बैठा कर रोज रात
को बच्चों को सुनायें, चाहे मुंशी प्रेम चन्द, शरत चन्द्र, शिवानी, आशापूर्णा
देवी की कहानियां हम अपनी पाठ्य-पुस्तकों में पढ़ें, थोड़ी देर के लिये ही सही,
कहानियां हमें एक नये संसार में ले जाती हैं जहां हम कहानी के पात्रों के सुख
और दुःखों के साथ एकाकार हो जाते हैं। कभी कहानी संस्मरणात्मक हो जाती हैं तो
कभी पूर्णतः कल्पित हो सकती हैं परन्तु उनकी उपादेयता से इंकार नहीं किया जा
सकता। मनोरंजन तो कहानियां देती ही हैं, साथ ही, एक संदेश भी देती हैं जो हमें
जीवन पथ पर सही राह दिखाते हैं।
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