Kaavya-kalash  :  काव्य कलश 

यदि आप दिल की आवाज़ सुनने में यक़ीन रखते हैं या आपका दिल भी कुछ सुनाना चाहता है तो निश्चय ही यह पेज आपके लिये है।  सहारनपुर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक व साहित्यिक राजधानी कहा जाये तो कुछ अतिश्योक्ति नहीं है।  सहारनपुर की धरती में कुछ न कुछ ऐसा है कि वह लोग भी यहां आकर कविता कहने लगते हैं जिन्होंने जीवन में कभी कविता की गलियों में पांव भी नहीं रखा।  सहारनपुर में काव्य - सृजन में तल्लीन कवियों की एक विशाल फौज मौजूद है जिनमें कुछ के नाम तो सहज ही लिये जा सकते हैं।

क्या आप कभी अपने हृदय के उद्‌गार व्यक्त करने के लिये कागज़-कलम उठाते हैं/ उठाती हैं ?   क्या आप कलाकार हैं और कार्टून, चित्र, पेंटिंग इत्यादि बनाने का शौक रखते/रखती हैं?   द सहारनपुर डॉट कॉम की ओर से आपको आमंत्रण है कि आप अपनी रचनायें (कवितायें, गीत, लेख, निबंध, कहानी, गज़ल, गीत, नज़्म, बज़्म  आदि)  प्रकाशनार्थ हमें प्रेषित करें।  यदि आपकी रचना हमें अच्छी और प्रकाशन हेतु उपयुक्त लगी तो हम उसे स्थान देने का अवश्य ही प्रयास करेंगे । 

अपनी रचनायें हमें प्रेषित करते समय यह अवश्य पुष्टि करें कि यह रचना आपकी अपनी मौलिक कृति है और न तो यह किसी पत्र  - पत्रिका - पुस्तक - ब्लॉग - वेबसाइट आदि में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है और न ही कभी प्रकाशित हुई है।

आप अपनी रचनाओं की प्रति अपने पास अवश्य सुरक्षित रखें क्योंकि आपकी रचनाओं / कृतियों को वापिस करना हमारे लिये संभव  नहीं होगा।  आपके द्वारा प्रेषित रचना को मूल रूप में अथवा संपादित रूप में प्रकाशित करने अथवा प्रकाशित न करने का निर्णय लेने का संपादक मंडल को पूर्ण विवेकाधिकार है।

 हमारे नियमित कवि

आर. पी. शुक्ल

३७ वर्ष तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहने के पश्चात्‌ आर.पी. शुक्ल के पास समाज को देने के लिये बहुत कुछ है। आपकी ग़ज़लें, हाइकु व छ्न्दमुक्त कवितायें हम यहां आपको देते ही रहेंगे। पढ़िये शुक्ल जी की कवितायें
 

कृष्ण शलभ

कविता, गीत, लोक-साहित्य, समीक्षा, शोध-लेख और बाल-साहित्य कृष्ण शलभ जी के लेखन की विधायें हैं। आपके द्वारा लिखित / संपादित अनेक बाल-कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। देश की प्रमुख और प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं का निरंतर प्रकाशन होता रहता है। बचपन एक समंदर बाल-कविताओं के संग्रह का सम्पादन आपका एक भागीरथ प्रयास है जिसमें आपने पिछले १०० वर्षों में १०० से भी अधिक कवियों द्वारा रची गई प्रतिनिधि रचनाओं का अभूतपूर्व संकलन किया है। ६६६ बाल-कविताओं का संग्रह बचपन एक समंदर एक संग्रहणीय ग्रंथ बन पड़ा है। हिन्दी साहित्य जगत को श्री कृष्ण शलभ की इस अद्‌भुत देन के लिये उनको जितना भी साधुवाद दिया जाये, कम ही है।  उनकी कुछ कवितायें
 

राजेन्द्र ’राजन’

कुंवर बेचैन के शब्दों में, "राजन के गीत सीधी-सादी ज़बान में युवा-हृदयों की धड़कनों का पर्याय हैं। उनमें प्रेम की गहरी अनुभूतियों के अनन्त बिन्दु तो हैं ही साथ ही मांसल सौन्दर्य की बेबाक किन्तु प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति की लयात्मक और रोमांचक तरंगें भी है। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों पर भी अनेक प्रभावशाली गीत लिखे। गीत स्वयं में गीत होकर अपने प्रभाव में कितने सशक्त और तरल हो सकते हैं, इस बात की जानकारी यदि करनी हो तो राजेन्द्र राजन के गीतों में उतरिये।" यहां हम राजेन्द्र राजन के गीत संग्रह "केवल दो गीत लिखे मैने" से कुछ चुनिन्दा रचनायें आपके लिये प्रस्तुत कर रहे हैं।
 

सुरेश ’सपन’

 ’किसी का दर्द बांटोगे तो तुमको चैन आयेगा’ जैसी उदात्त भावना जिसके कोमल, सरल हृदय में वास करती हैं उस अत्यन्त सुरीले कवि का नाम है सुरेश ’सपन’। सहारनपुर में काव्य सृजन को एक सृजनात्मक आंदोलन के रूप में गति देने वाले गतिमान कवियों में सुरेश ’सपन’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। हमारा प्रयास है कि हम कविवर सुरेश ’सपन’ की नवीनतम रचनायें नियमित रूप से आपको रससिक्त करने हेतु परोसते रहें।
 

डा. विजेन्द्रपाल शर्मा

’विभावरी’ के आधार स्तंभ, स्वर और शब्दों के जादूगर, साहित्य के मर्मज्ञ, अचेतन में चेतना फूंक देने वाले गीतों के प्रणेता एवं काव्य मंचों पर अमिट प्रभाव छोड़ने वाले मुखर गीतकार के रूप में डा. विजेन्द्रपाल शर्मा की पहचान है। ’शाकुंभरी मइया के द्वार’ भक्ति गीतों की कैसेट तथा एक कहानी व एक गीत संग्रह व शताधिक रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में आपकी विशेष रुचि है। व्यावहारिक समाज सेवा में आप विश्वास रखते हैं। आपकी कुछ प्रतिनिधि रचनायें
 

योगेश छिब्बर

योगेश छिब्बर पिछले अनेक वर्षों से प्रेम और अध्यात्म को केन्द्र में रखते हुए दोहे, टप्पे, ग़ज़ल और क्षणिकायें लिखते-गाते चले आ रहे हैं। उनकी कविता ’अम्मा’ इस वेब पोर्टल के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई है और न जाने कितने व्यक्तियों को कविता लिखने के लिये प्रेरित करती चली आ रही है। नगर एवं नगर के बाहर कला, साहित्य एवं संस्कृति के संवाहक के रूप में जाने जाते हैं। हिन्दी काव्य साहित्य में लुप्तप्राय हो रही दोहा, टप्पा जैसी कठिन विधाओं को सहजता एवं सरसता से जन-जन तक पहुंचाने में आप सफल रहे हैं।
 

कमलेश भट्ट ’कमल’

गाज़ियाबाद निवासी कमलेश भट्ट ’कमल’ ग़ज़ल व हाइकु लेखन में विशेष रुचि रखते हैं व जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए बहुत सलीके से अपनी बात कहने के लिये प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में आप सहारनपुर में व्यापारकर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।  आपकी कुछ रचनायें यहां प्रस्तुत हैं।
 

कश्मीर सिंह

कश्मीर सिंह कवि के रूप में सामने आयें या कथाकार के रूप में, आपके सामाजिक सरोकार व आदर्श दोनों जगह प्रकट होते हैं व प्रभावित करते हैं। पेशे से बैंक अधिकारी कश्मीर सिंह सहारनपुर की साहित्यिक संस्था ’विभावरी’ के अध्यक्ष के नाते सहारनपुर में रचनात्मक आंदोलन को गति प्रदान करते चले आ रहे हैं। अपने मधुर स्वभाव, सहयोगात्मक प्रवृत्ति व सामाजिक सरोकारों के लिये आप हर किसी के हृदय में वास करते हैं। कश्मीर सिंह की कहानियां - माफ करना सर ! / एक्सीडेंट    कश्मीर सिंह की कवितायें
 

नरेन्द्र ’मस्ताना’

बाल गीतकार के रूप में नरेन्द्र ’मस्ताना’ की नगर में पहचान है। आप विभावरी से जुड़े हैं और अपने मृदु स्वभाव के कारण हर किसी के चहेते हैं। द सहारनपुर डॉट कॉम में आपकी प्रथम काव्य रचना होली के अवसर पर प्रकाशित हुई थी - उड़ने लगे गुलाल सखि बरसाने में’ । आगे भी उनकी रचनायें आप तक पहुंचती रहेंगी।
  

डा. वीरेन्द्र आज़म

पेशे से पत्रकार डा. वीरेन्द्र ’आज़म’ विभिन्न मंचों पर साहित्यिक अंदाज़ में कार्यक्रम संचालन करते देखे जाते हैं। रिपोर्टिंग की आपकी अपनी एक गरिमापूर्ण शैली है। कोमल हृदय वीरेन्द्र कविताओं के माध्यम से अक्सर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देते हैं।
 

आसिम पीरज़ादा

 आसिम पीरज़ादा को हास्य-कवि के रूप में ख्याति प्राप्त है। वह जब मंच पर कविता पढ़ने के लिये खड़े होते हैं तो अपनी चुटीली रचनाओं से सभी श्रोताओं को भरपूर मनोरंजन तो देते ही हैं, पर उनको चिंतन के लिये बहुत सारी सामग्री भी देते हैं। पिछले कुछ दिनों से उन्होंने संजीदा शायरी की ओर रुख किया है। कब किया, क्यों किया और कैसे किया - यह उनके ग़ज़ल संग्रह ’जलवा करीब है’ में पढ़िये और आनंदित होते रहिये।
 

श्रीमति सुषमा जैन

श्रीमती सुषमा जैन प्रखर देशभक्त, अनेकानेक पुरस्कारों से नवाज़ी गई वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका हैं और ओजस्वी वक्ता तो आप हैं ही । आप जब-जब विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर बोलने के लिये खड़ी होती हैं तो हर कोई उनको दत्तचित्त होकर सुनता है। अपनी ओजस्वी वाणी, गंभीर चिंतन-मनन व सामाजिक सरोकारों के लिये आपका नाम आदर से लिया जाता है। द सहारनपुर डॉट कॉम को आप एक श्रेष्ठ प्रयास मानती हैं और इसके माध्यम से भी उनके विचार आप तक पहुंचते रहेंगे, ऐसा उनका वादा है। शुरुआत एक कविता से ! जी हां, आप कविता भी लिखती हैं।
 

श्रीमती निशी जैन

 श्रीमती निशी जैन सामान्यतः जैन मिलन व व्यापार मंडल के मंचों पर विभिन्न उत्तरदायित्व संभालते हुए देखी जाती हैं पर हमारे कुरेदने पर उन्होंने स्वीकार किया कि हां, उनको कविता का भी शौक है। अक्सर लिखती हैं, पर प्रकाशन हेतु कभी कोई रचना नहीं भेजी है। उनकी चुनिंदा रचनायें हम यहां आपके लिये प्रस्तुत कर रहे हैं। 
 

अंकुर मल्होत्रा

Ankur Malhotra is Design Engineer in NTPC and has been visiting since since the very early days of this web portal. Ankur is proud of being a Saharanpurian and finds this web portal as a great effort in the right direction. This is the first time that he has sent to us two of his Hindi poems. We feel that our readers will enjoy these.  Click to read him >>
 

आंचल अग्रवाल

Aanchal Agarwal is an MBBS student of Meerut Medical College who keeps sending to us her poetic expressions through SMS. "Writing poetry is for me a means of staying fresh, vibrant with energy and happily alive." Click to read her Click to read her >>
 

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