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सहारनपुर में लोहा/पीतल/एल्यूमीनियम का बाज़ार
लोहानी सराय जैसा कि नाम से कुछ अंदाज़ा किया जा सकता है, लोहानी सराय मार्किट में मुख्यतः लोहे का सामान मिलता है। राज मिस्त्री, बढ़ई, पेंटर, मैकेनिक, मज़दूर, हलवाई, किसान, सैनिटरी फिटिंग करने वालों को जिस सामान की व जिन औज़ारों की जरूरत होती है वह सब सामान लोहानी सराय में ही मिलता है जैसे - कीलें, पेंच, गेंती, फावड़े, हथौड़ी, पेचकस, प्लास, पेंट, डिज़ाइनदार टाइल, लोहे की जाली, रबड़ के पाइप, टोंटियां, नलके, ताले, कुंडे, चटकनी, लोहे की चादरें, एल्यूमीनियम व पीतल की सजावटी फिटिंग्स (चटकनी, ताले, कुंडे, कब्ज़े, पर्दे की फिटिंग्स), मच्छर जाली, पाइप, रेलिंग्स आदि वगैरा - वगैरा जिनकी गिनती करना असंभव ही है। । मेरठ और गाज़ियाबाद के व्यापारियों को भी इस मार्किट में घूमते देखा जा सकता है। (पता नहीं, वे सामान बेचने आते हैं या खरीदने)। ललिताप्रसाद अख्तर बाज़ार (लोहा बाज़ार)
इस मार्किट में, जिसका नाम प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी ललिता प्रसाद अख्तर के नाम पर रखा गया है, स्वतंत्रता संग्राम की दो महत्वपूर्ण यादें भी दिखाई देती हैं ! एक है रानी लक्ष्मी बाई का स्मारक और दूसरी है अंग्रेज़ों के जमाने की कोतवाली। इस स्मारक के ऊपर स्थित पेड़ पर अनेक क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया गया था। |
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