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सहारनपुर की कुछ विशिष्ट समाज-सेवी संस्थाये
1. संकल्प (मूक बधिर बच्चों को समर्पित संस्था) (For deaf & dumb children) ’संकल्प’ संस्था में जाइये तो आपको ढेरों हंसते - खिलखिलाते - खेलते बच्चे मिलेंगे पर आप उनको ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि वे सब आपस में बात करते अवश्य हैं परन्तु ऐसे नहीं जैसे हम सब करते हैं। ये सब बच्चे हमारी तरह बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते पर यह संकल्प की मेहनत का सुफल है कि ये सब बच्चे अपनी इस शारीरिक अक्षमता को लेकर दुःखी नहीं रहते, और आत्मविश्वास से भी भरपूर हैं। शायद आपको आश्चर्य होगा कि यहां के बच्चों ने काक-भगोड़ा नामक नाटक में भी अपनी अभिनय क्षमता का भरपूर परिचय दिया और लगभग एक मास तक चलने वाली नाटक की रिहर्सल के दौरान खूब मजे किये और मेहनत भी की। ’संकल्प’ संस्था के निर्माण व संचालन का श्रेय डा. रेखा कुमार को जाता है। संस्था जे.वी.जैन कॉलिज के सामने मल्हीपुर रोड पर स्थित है। 2. दृष्टिहीनार्थ बाल विद्यालय (School for Visually Handicapped Children) दृष्टिहीन बच्चों के लिये सहारनपुर में दो विद्यालय हैं - नीलकंठ विहार, भूतेश्वर मंदिर मार्ग पर चल रहा विद्यालय बालकों के लिये और हकीकत नगर में बालिकाओं के लिये। बालकों के लिये चल रहे विद्यालय में लगभग ३७ बच्चे पढ़ रहे हैं। इस आवासीय विद्यालय का समस्त व्यय सहारनपुर नगर के अनेकानेक दानदाता उठाते हैं। बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो नियमित रूप से वहां दान में अनाज, घी, तेल, चीनी, आटा आदि पहुंचाते रहते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो नियमित रूप से न भी सही, पर विशेष अवसरों पर अवश्य दान देना चाहते हैं। बच्चों को दोपहर का भोजन कराने की इच्छा हो तो संस्था की डायरी में तारीख देखनी पड़ती है कि कौन सा दिन खाली है। एक समय के भोजन का व्यय लगभग 450 रुपये माना जाता है। आप स्वयं उस समय भोजन शाला में उपस्थित रह कर अपने हाथ से भोजन परोस कर बच्चों को खिलायें तो आप अनुभव करेंगे कि ये बच्चे दृष्टिहीन होते हुए भी दृष्टिहीन नहीं हैं। एक बार थाली में अपनी उंगलियों के स्पर्श से देख लें कि कहां क्या है तो बस, फिर एकदम सामान्य रीति से भोजन कर लेते हैं। और भोजन ही क्यों, अपना ये आवासीय विद्यालय इनका देखा भाला हुआ है अतः इतने सामान्य ढंग से चलते हैं कि छड़ी की आवश्यकता अनुभव ही नहीं होती। यही स्थिति हकीकत नगर स्थित अंध बालिका विद्यालय की भी है। 3. ऑल इंडिया वूमेन कॉन्फ्रेंस (Empowering women of weaker sections) बाजोरिया मार्ग पर जिलाधिकारी की कोठी के निकट AIWC संस्था है जिसकी मुख्य नियंत्रक श्रीमती कुंती पाल हैं। यहां पर महिला सशक्तीकरण की दिशा में प्रयास चल रहा है जिसके अन्तर्गत युवतियों को स्वावलंबी बनाने के लिये उनको विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध हैं। जैसे सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण आदि। 4. वनवासी कल्याण आश्रम (A home away from home for helpless children) सुदूर उत्तर पूर्व (आसाम, नागालैंड, मिज़ोरम आदि) के राज्यों में अनेकानेक परिवार ऐसे हैं जहां अकल्पनीय सीमा तक गरीबी दृष्टिगोचर होती है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना भी परिवार के लिये कठिन होता है। ईसाई संस्थायें वहां मौजूद हैं जो सहायता करने के बदले परिवारों को धर्म परिवर्तन का विकल्प देती हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत के अनेकानेक स्थानों पर वनवासी कल्याण आश्रम की शाखायें स्थापित की गई हैं ताकि हमारा देश इन लोगों की स्वयं सहायता करने के लिये तत्पर हो और इनको बलात् या धोखे, लालच के सहारे धर्म परिवर्तन न करा दिया जाये। सहारनपुर में भी नवाब गंज चौक पर वनवासी कल्याण आश्रम की एक शाखा चलती है जो पहले बेहट रोड पर वेद मंदिर के पास थी। यहां लगभग ३० विद्यार्थी हैं जो पूर्वोत्तर प्रान्तों से यहां आकर विभिन्न स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं। इस संस्था का व्यय समाज के विभिन्न दानदाता परिवार उठाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की प्रेरणा से चल रही है।
5. मानव मंदिर (A home for the deserted senior citizens) मानव मंदिर जैसी संस्थाओं की स्थापना की आवश्यकता हमारे भारतीय समाज में भी पड़ने लगी है यह हमारे समाज के पाश्चात्य देशों के उपभोक्तावादी समाज के मार्ग पर चलने का परिणाम है। यहां अधिकांशतः ऐसे वृद्ध हैं जिनको उनके अपने परिवार में जगह नहीं मिली और वह अपनी आयु के बचे-खुचे दिन यहां वृद्धाश्रम में रह कर बिता रहे हैं। जे.वी. जैन कॉलिज के निकट स्थित इस आश्रम के बारे में सुना ही है, आज तक जाने का अवसर नहीं आया है। पर लगता है कि अब आप सबको इसकी आधिकारिक जानकारी देनी है तो हो कर आना ही चाहिये। इस मानव मंदिर की स्थापना स्व. ला. रामलाल जी (इंडियन हर्ब्स रिसर्च एंड सप्लाई कं. शारदा नगर, सहारनपुर के संस्थापक) के अथक प्रयासों से वर्ष 1972 में हुई थी। 6. मदर टेरेसा होम (A home for the homeless children and women)
नवीन नगर शिव मंदिर से थोड़ा आगे चलें तो मदर टेरेसा होम स्थित है। यहां कम से कम बीस बच्चे और १०-१२ असहाय, बीमार महिलायें हैं जिनकी देखभाल यह ईसाई संस्था कर रही है। इस संस्था का अधिकांश खर्च सहारनपुर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा वहन किया जाता है। इस चित्र में दिखाई दे रहे बच्चे अक्सर मदर टेरेसा होम के गेट से बाहर झांकते हुए ऐसे आगंतुकों की प्रतीक्षा किया करते हैं जो उनके लिये कुछ टॉफी - खिलौने आदि उपहार लेकर आयें।
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