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भारत में हाइकु के आगमन की स्वर्ण जयंती
पर विशेष काव्य-गोष्ठी का आयोजन
सहारनपुर : ’हाइकु’ सुदूर जापान
देश से चल कर भारत तक आ पहुंची कविता की एक नयी शैली है जो देखने में
बड़ी सरल प्रतीत होती है, पर बिहारी के शब्दों में कहा जा सकता है - "देखन
में छोटे लगें, घाव करें गंभीर।" हाइकु में केवल तीन पंक्तियों की गागर
में ही पूरा सागर उड़ेलना होता है, जो सफल होगया तो हो गया वरना तो
डस्टबिन सबसे अच्छा दोस्त है ही ।
हाइकु शैली को भारत में महाकवि अज्ञेय १९५९ में लेकर आये थे। उन दिनों
वह चर्चा में आई अवश्य किन्तु आगे नहीं बढ़ पाई। धीरे-धीरे, हिन्दी के
कुछ श्रेष्ठ कवियों ने हाइकु को अपनाया और बड़ी सफलता से अपनाया।
संयुक्त अरब इमारात में बस चुकीं पूर्णिमा वर्मन के भागीरथ प्रयासों के
परिणाम स्वरूप, इंटरनेट पर वर्ष २००० से ’अभिव्यक्ति’ और अनुभूति के
नाम से हिन्दी की दो जाल-पत्रिकायें प्रकाशित हो रही हैं जो अब विश्व
भर में फैले हिन्दी पाठकों के मध्य खासी लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी
हैं। यह सहारनपुर का सौभाग्य ही है कि भारत में हाइकु की स्वर्ण जयंती
के अवसर पर पूर्णिमा वर्मन संयुक्त अरब इमारात से
सहारनपुर पधारीं और सहारनपुर के साहित्याकाश से एक हाइकु काव्य गोष्ठी
के बहाने उनका साक्षात्कार हुआ। जब देश विदेश के कवियों की यह गोष्ठी
जमी तो ऐसी जमी कि फेवीकोल का मजबूत जोड़ याद आ जाये। आखिर कवियों को
क्या चाहिये होता है ? कुछ अदद साहित्य-प्रेमी श्रोतागण, बस !
कबीर साहित्य के मर्मज्ञ श्री के.पी. पाण्डेय की अध्यक्षता एवं शारजाह
से पधारी वरिष्ठ पत्रकार एवं कवयित्री पूर्णिमा वर्मन को मुख्य अतिथि
के पद पर आसीन करने के बाद हाइकु कविताओं की रसधार बहनी आरंभ हुई तो
देर रात तक चलती ही रही। डा. आर. के. सैनी ने प्रकृति से छेड़छाड़
पर अपनी चिंता कुछ यों व्यक्त की - पृथ्वी के बाद / चांद पर धमाका /
कौन बचेगा ? उन्होंने हताशा में घिरे लोगों को संदेश दिया - "हिम्मत रख
/ अकेले चलने की / कारवां होगा!" डा. सपना सिंह एडवोकेट ने पुरानी यादों
को कुछ इस तरह खंगाला - "उग आये हैं / फिर यादों के पंख / बरसों बाद। "
उनका यह हाइकु भी सराहा गया - "उड़ गई वो / चिरैया आंगन की / साथ इतना
।"
पत्रकारिता के साथ, हाइकु में भी जोर आजमाइश कर रहे वरिष्ठ पत्रकार डा.
वीरेन्द्र आज़म की हाइकु भी मुंह लटकाये बैठने के बजाय प्रसन्नता का
संदेश कुछ इस तरह दे रही थी - हे कामनाओं / मुंह लटकाये हो / श्रृंगार
करो ! उनका एक और हाइकु देखिये, "खुली न छोड़ें / खिड़कियां रातों को /
जाड़ा झांकेगा !" देश के प्रख्यात ग़ज़लकार एवं हाइकुकार कमलेश भट्ट कमल
ने काव्य गोष्ठी को एक नया और ऊंचा धरातल प्रदान करते हुए जीवन की
सच्चाइयों को कुछ इस तरह बयान किया - "रिश्तों से ज्यादा / तनाव बसते
हैं / घरों में अब।" उनके संवेदनशील हृदय की थाह पानी हो तो "वर्षा से
ज्यादा / किसान की आंखों से / पानी बरसा।" हाइकु पर गौर किया जाना
चाहिये। सामाजिक विकृतियों पर कटाक्ष का यह अंदाज़ भी श्रोताओं को बहुत
भाया "मेघ भी अब / रिश्वत चाहते हैं / बरसने को" । अपनी मूल शैली ग़ज़ल
में तो उनका अंदाज़ देखे ही बनता था - "विरोध अपना जताने का पेड़ का भी
है, जहां से शाख काटी थी, वहीं से कोंपलें निकलीं।" |
बाल साहित्य के
कुशल चितेरे गीतकार व वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण शलभ के सरस स्वर में "फिर
आ बैठी आज तुम्हीं सी, किरण पंखिया भोर बगल में" सुन कर कौन ऐसा होगा
जो वाह-वाह न कर उठे। मुख्य अतिथि पूर्णिमा वर्मन की एक रचना की
पंक्तियां कुछ यूं थीं - कुछ तो जीना हो या रब / धूल पसीना हो या रब /
कंकरीट का जंगल है, कहीं पुदीना हो या रब ।
पूर्णिमा वर्मन का परिचय
२७ जून १९५५ को पीलीभीत, उत्तर
प्रदेश में जन्मी पूर्णिमा वर्मन जाल पत्रिका अभिव्यक्ति और अनुभूति की
सम्पादक हैं। पत्रकार के रूप में अपना कार्य-जीवन आरंभ करने वाली
पूर्णिमा को हिन्दी को इंटरनेट पर सफलता पूर्वक स्थापित करने का श्रेय
जाता है। उनकी दोनों जाल-पत्रिकायें देश - विदेश में फैले हिन्दी के
सुधी पाठकों को पाक्षिक रूप से हिन्दी काव्य-जगत की नवीनतम रचनाओं से
परिचित कराते हुए हिन्दी की साहित्यिक पत्रिकाओं के निरंतर अनुभव होरहे
अभाव की काफी हद तक पूर्ति कर रही हैं।
वर्ल्ड वाइड वेब पर हिन्दी को लोकप्रिय बनाने के अपने प्रयासों के लिये
पूर्णिमा को वर्ष २००६ में भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, साहित्य
अकादमी तथा अक्षरम के संयुक्त अलंकरण ’अक्षरम प्रवासी मीडिया सम्मान’
से सम्मानित किया गया है। साथ ही, रायपुर छत्तीसगढ़ की संस्था सृजन
सम्मान द्वारा ’हिंदी गौरव सम्मान ’ से भी विभूषित किया गया है। उनका
एक कविता संग्रह ’वक्त के साथ’ प्रकाशित हुआ है। पूर्णिमा वर्तमान में
संयुक्त अरब इमारात के शारजाह नगर में निवास करती हैं और हिन्दी के
अंतर्राष्ट्रीय विकास के अनेक कार्यों से जुड़ी होने के साथ-साथ हिन्दी
विकीपीडिया के प्रबंधकों में से भी एक हैं।
संपर्क सूत्र -
Purnima Varman
P.O. Box 25450
Sharjah, UAE
ईमेल -
abhi_vyakti@hotmail.com
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