एकल विद्यालय योजना : शिक्षित भारत - स्वस्थ भारत - समर्थ भारत के लक्ष्य को समर्पित एक सृजनात्मक जन-आंदोलन

Ekal Vidyalaya Scheme : Dedicated to Educated, healthy and mighty India

 

योजना का प्रारूप

"आओ जलायें दीप वहां, जहां अभी भी अंधेरा है।"  यही ध्येयवाक्य लेकर भारत लोक शिक्षा परिषद्‌ (पंजीकृत)  ने वर्ष 2000 में भारत के उन बीहड़ स्थानों, जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में व्याप्त निरक्षरता के अंधकार को मिटाने के लिये एकल विद्यालय योजना का सूत्रपात किया था वर्ष 2000 में 78 विद्यालयों से आरंभ करते हुए वर्ष 2005 तक 1410 विद्यालय खोले जा चुके थे।  अकेले सहारनपुर जनपद में 240 एकल विद्यालय चल रहे हैं।  इस योजना का वैशिष्ट्य यह है कि विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के लिये संबधित ग्राम के ही एक शिक्षित युवक / युवती को शिक्षक / आचार्य के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है।  इस प्रशिक्षण में संभावित आचार्य को न केवल शिक्षण कला का ही ज्ञान कराया जाता है वरन्‌ अन्य बातें - जैसे प्राथमिक चिकित्सा,  बच्चों को संस्कार संपन्न बनाना, खेल-कूद कराना आदि के बारे में भी आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है।  इन विद्यालयों में गांव के लगभग ३०-४० बच्चे हंसी-खुशी और खेल-कूद के वातावरण में अनौपचारिक रीति से कक्षा ३ तक की शिक्षा प्राप्त करते हैं जिसके पश्चात इन बच्चों को नियमित विद्यालयों में भर्ती करा दिया जाता है। 

दानदाताओं हेतु जानकारी  

भारत लोक शिक्षा परिषद्‌ (पंजी.)  विदेशी अनुदान के लिये Foreign Contribution Regulation Act 1976 (FCRA) के अंतर्गत तथा स्थानीय अनुदान के लिये आयकर अधिनियम की धारा 80 G के अन्तर्गत पंजीकृत है।  दानदाता यदि चाहें तो 1100/- वार्षिक देकर उन दूर बैठे उपेक्षित बालकों को संरक्षण प्रदान कर सकते हैं।

गुल्लक योजना

एक बालक दूसरे बालक के दर्द को समझे और बाल्यकाल से ही देश के संस्कार उनमें प्रस्फुटित हों इस लिये परिषद्‌ ने एक गुल्लक योजना भी चलाई है जिसको लेकर माता-पिता, अभिभावकों व बच्चों में काफी उत्साह है।  बालकों में छोटी आयु से ही छोटे-छोटे दान / थोड़े - थोड़े पैसे गुल्लक में डाल कर असमर्थों की सहायता और समाज सेवा की भावना जगती है।