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जीवन में इतनी दीवाली मिलें आपको
जितने दीपों से मिल कर दीवाली बनती |
या सागर में जल की बूंदों जितनी कह दूं
मैं अनपढ़ क्या जानूं कितनी इनकी गिनती ।

 

May the twinkle of hope in each one's eyes across the globe be the
real DEEPAK this DIWALI.  Wishing you a joyful and happy Diwali.

- Sushant, Sandeep, Ankit & Ajay

and the entire team of
The Saharanpur Dot Com

 
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ग़ज़ल

(प्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री कमलेश भट्ट कमल ने हमारे विशेष अनुरोध पर आप सब के लिये
दीपावली की शुभ कामनायें कुछ ऐसे दी हैं।)

मुश्किलों की धुंध में जैसे इमारत रोशनी की
शायरी क्या है, कलम से है इबादत रोशनी की।
जुगनुओं ने हर तरफ लिख दी इबारत रोशनी की
इस तरह कायम रही, हर रात ताकत रोशनी की ।
कोशिशें तो खत्म करने की, अंधेरों ने बहुत की
आदमी में आज तक फिर भी है चाहत रोशनी की।
कोई दुश्मन कैद करके, रख नहीं पायेगा हरगिज़
कल भी थी, कल भी रहेगी, बादशाहत रोशनी की।
तुहमतें जिनको लगाना है, लगायेंगे ही लेकिन
तुहमतों से कम नहीं होती शराफत रोशनी की ।
रोशनी की जो अमानत वक्त से हमको मिली है
वक्त को लौटायेंगे हम वह अमानत रोशनी की ।

- के एल १५४, कवि नगर, गाज़ियाबाद

सम्प्रति - श्री कमलेश भट्ट कमल व्यापार कर विभाग में उपायुक्त पद को सुशोभित कर रहे हैं व सहारनपुर में ही तैनात हैं।


हमनें सहारनपुर की कुछ लोकप्रिय विभूतियों के वीडियो क्लिप्स तैयार किये हैं।  इनके अलावा हमें बहुत सारे शुभकामना संदेश  ( SMS )मोबाइल के माध्यम से भी प्राप्त हुए हैं ।  इनके पढ़ने के लिये क्लिक करें।  

श्री आर. पी. शुक्ल की ओर से शुभेच्छायें

(श्री आर. पी. शुक्ल (निवर्तमान मंडलायुक्त, सहारनपुर मंडल) ने फोन पर लखनऊ से सहारनपुर वासियों के लिए अपनी कोमल भावनाओं को अभिव्यक्ति इन शब्दों में दी है।)

सहारनपुर वासियों को मेरा प्यार भरा नमस्ते।  आज भले ही मैं सशरीर आप सब के बीच में मौजूद नहीं हूं, पर आप सब ने मुझे अपार प्यार और मुहब्बत दी है, उसे लेकर मेरे दिल में आप सब की बहुत सारी मधुर स्मृतियां सुरक्षित हैं। यहां लखनऊ आकर भी आप सब का ही जिक्र चलता रहता है। 

आज इस ज्योति पर्व पर आपको, आप सबके परिवार को सब प्रकार की खुशियां मिलें, आप सब फलें-फूलें,  सहारनपुर का दुनियां भर में एक सुन्दर शहर के रूप में नाम फैलायें,  दुनियां भर के लोग आपकी ओर आकर्षित हों, यही मेरी दुआ है, कामना है, आशीर्वाद है।

  -आर. पी. शुक्ल,
नवनिर्माण भवन, 401, 4th floor,
निकट जोशी क्लासेज़, प्राग नारायण रोड,
लखनऊ

श्री कमलेश भट्ट कमल की
कुछ हाइकु रचनायें

श्री आर. पी. शुक्ल की
कुछ हाइकु रचनायें

कौन मानेगा
सबसे कठिन है
सरल होना ?

* * *

समुद्र नहीं
परछाई खुद की
लांघो जो जानें।

* * *

मुझमें भी हैं
मेरी सात पीढ़ियां
तन्हा नहीं मैं।

वृक्षों ने चाही
हिस्से भर की धूप
सुखी रहे वे ।

* * *

है कोई रात
जिसका अभी तक
न हुआ प्रातः ?

* * *

सूर्य जिन्दा है
धुन्ध के उस पार
निराशा कैसी ?

वह रोकता
तो रुक भी जाता मैं
रोकता तो वो ।

* * *

और कौन है
दुश्मन मेरा, दोस्त
मैं ही खुद हूं।

* * *

लौटेगा जब
खून से लथपथ,
माथा चूमूंगा।

चाहूं हूं तुझे
गांव की माटी क्योंकि
जानू हूं तुझे ।

* * *

खुदा है तो आ
मेरी मदद कर
वरना बुत है।

* * *

हिरन दौड़ा
मरीचिका के पीछे
तो पानी हंसा ।

   
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